हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने के बजाय कांग्रेस आत्ममंथन करे-गोपालसिंह इंजीनियर, जब चुनाव जीते तो सब चंगा ओर हारे तो ईवीएम ओर चुनाव आयोग दोषी कांग्रेस का ये दोहरा मापदंड क्यो.?

आष्टा । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस को चुनावी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि जिस चुनाव आयोग की संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से कई राज्यों में सरकार बनाने का अवसर मिला, उसी चुनाव आयोग पर आज लगातार सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। यदि कांग्रेस को चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर ही अविश्वास है, तो फिर केरल में कांग्रेस की जीत का क्या अर्थ है?

हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार इसी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुए चुनाव के बाद बनी है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि हार के समय चुनाव आयोग पर सवाल और जीत के समय उसी आयोग की प्रक्रिया को स्वीकार करना, यह दोहरा मापदंड क्यों है? विधायक इंजीनियर ने कहा कि लगातार चुनावों में कांग्रेस की पराजय के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कांग्रेस को अपने प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए यह विचार करना चाहिए कि तमिलनाडु में वह लंबे समय से कमजोर क्यों है, पश्चिम बंगाल में दशकों से सत्ता से बाहर क्यों है

तथा उत्तरप्रदेश और बिहार सहित देश के अनेक राज्यों में उसका जनाधार लगातार क्यों कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब चुनाव आयोग को दोष देने में नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठन, नेतृत्व, रणनीति और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से जुड़ाव की स्थिति के आत्ममंथन में मिलेगा। कांग्रेस एक डूबता जहाज है,कांग्रेस को यह देखना चाहिए कि जनता का विश्वास उससे क्यों दूर हुआ और पार्टी लगातार कई राज्यों में अपना राजनीतिक आधार क्यों खोती गई। विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

देश में चुनाव की पूरी प्रक्रिया संविधान और कानून के तहत स्वतंत्र एवं संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग के माध्यम से संपन्न होती है। चुनावी पराजय को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों को स्वीकार करना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। जनता के निर्णय को सम्मान देना ही लोकतंत्र की वास्तविक भावना है। लगातार चुनावी पराजय के बाद अराजकता का वातावरण बनाने अथवा संवैधानिक

संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाने का प्रयास लोकतंत्र के हित में नहीं है। विधायक इंजीनियर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत आज पूरी दुनिया के सामने मजबूती के साथ खड़ा है। एक अत्यंत साधारण परिवार से निकलकर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश का मान-सम्मान बढ़ाया है और प्रधानमंत्री पद की गरिमा को स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश निरंतर आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका मजबूत हुई है। उनकी लोकप्रियता को कम करने के प्रयास सफल नहीं होंगे। जनता का विश्वास केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से प्रभावित नहीं किया जा सकता।

विधायक इंजीनियर ने कहा की कांग्रेस को में अच्छी तरह और अंदर तक जानता हूं । कांग्रेस और उनके आकाओं को चाहिए कि वह अपनी कमजोरियों को स्वीकार करें, संगठन को मजबूत बनाएं और जनता के बीच अपना विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए सकारात्मक राजनीति करें। चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने के बजाय कांग्रेस को अपने राजनीतिक भविष्य पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वाेच्च होती है। जनता के निर्णय को स्वीकार करना और अपनी कमियों को दूर करना ही किसी भी राजनीतिक दल के लिए आगे बढ़ने का रास्ता है। कांग्रेस को भी चुनावी परिणामों से सबक लेते हुए आत्ममंथन करना चाहिए और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अपना विश्वास और सम्मान बनाए रखना चाहिए।

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