

आष्टा। आस्था, दृढ़ संकल्प और अटूट श्रद्धा के बल पर आत्मा को कंचन बनाने का महापर्व श्री श्वेतांबर जैन समाज में हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता रहा है। जैन समाज के गौरव और तपस्वी रत्न तेजस (आदि) राहुल धाड़ीवाल ने इस भीषण और चिलचिलाती गर्मी के मौसम में लगातार 45 दिनों की अत्यंत कठिन ‘उद्यान तप’ साधना को पूर्ण कर एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। इतनी कम उम्र में ऐसा कठोर संकल्प और अडिग श्रद्धा पूरे जैन समाज के लिए अलौकिक और प्रेरणादायी है। ज्ञात रहे कि पूर्व में भी तेजस द्वारा इस तरह की तपस्या की जा चुकी है।

इस आशय के विचार नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा ने तपस्वी तेजस के सफलतापूर्वक साधना पूर्ण करने पर उनके निवास पर पहुंचकर बहुमान करने के दौरान व्यक्त किए। सकल श्वेतांबर जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों, परिजनों और बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने तपस्वी के निवास स्थान पहुंचकर उनका भावभीना बहुमान किया। उपस्थितजनों ने जय जिनेंद्र और तपस्या की अनुमोदना के गगनभेदी जयकारों के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

समाज के वरिष्ठों द्वारा तपस्वी रत्न को शाल ओढ़ाकर, माला पहनाकर और बहुमान पत्र भेंट कर उनकी आत्म-साधना की सराहना की गई।कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहा संकल्प – इस अवसर पर नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा ने आगे कहा कि वर्तमान में जहां पारा आसमान छू रहा है और आम जनजीवन बेहाल है, ऐसे भीषण वातावरण में लगातार 45 दिनों तक अन्न का त्याग कर उद्यान तप जैसी कठिन साधना करना सामान्य मानवीय क्षमताओं से परे है। यह केवल और केवल आत्मिक शक्ति, गुरु कृपा और जिन शासन के प्रति अटूट विश्वास से ही संभव है।

इतनी अल्पायु में तेजस ने जो संयम और नियम का पालन किया है, वह युवा पीढ़ी के लिए धर्म के मार्ग पर चलने की एक नई राह दिखाता है।साता की प्रार्थना और कर्म निर्जरा की मंगलकामना – इस गौरवमयी प्रसंग पर संपूर्ण श्री श्वेतांबर जैन समाज ने शासन देव और परमात्मा से करबद्ध प्रार्थना की है कि तपस्वी तेजस सदैव साता स्वस्थ और अनुकूल अवस्था में रहें। समाजजनों ने भावुक मन से कहा कि उनकी यह कठोर आत्म-साधना और काय-क्लेश उनके पूर्व संचित कर्मों की निर्जरा का कारण बने और उन्हें मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करें। इस अवसर पर पार्षद रवि शर्मा, प्रवीण धाड़ीवाल, सुमित मेहता, प्रभात धाड़ीवाल, राहुल धाड़ीवाल, पराग धाड़ीवाल सहित अन्य समाजजन मौजूद थे।
