

🌕 *करवा चतुर्थी पर शुक्र अस्त व भद्रा का भ्रम न पालें*
*व्रत आदि बिना भ्रम के करें* 🌕
करवा चौथ के व्रत को लेकर शुक्र अस्त व भद्रा को लेकर अलग-अलग मान्यताएं और भ्रम फैलाए जा रहे हैं, वास्तविकता इस प्रकार है –
🔸 *तथ्य और परंपरा:*
विद्वानों और पंचांग मतों के अनुसार, करवा चौथ जैसे व्रत-पर्व के निर्णय में गुरु और शुक्र के उदय या अस्त होना कोई अनिवार्य शर्त नहीं माना गया है।

🔸 *नवविवाहिताओं के लिए:*
जो महिलाएं पहली बार करवा चौथ का व्रत शुरू कर रही हैं, वे बिना किसी भ्रम के अपनी परंपरा और श्रद्धा अनुसार व्रत की शुरुआत कर सकती हैं।
🔸 *उद्यापन का अंतर:*
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र अस्त होने की स्थिति में व्रत का उद्यापन या विशेष मांगलिक संस्कार टाले जाते हैं, लेकिन सामान्य करवा चौथ का व्रत सुहागिनें बिना किसी संशय के रख सकती हैं।

🔸 *भद्रा विचार:*
भद्रा स्वर्ग लोक में है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। भद्रा के कारण व्रत में कोई बाधा नहीं है।
🔸 *नवविवाहित महिलाएं व्रत रखें कि नहीं:*
इस साल से करवा चौथ व्रत की शुरुआत करने वाली वह भी इस साल से ही व्रत का आरंभ कर सकती हैं। क्योंकि शुक्र के अस्त होने से व्रत न करने की बात निराधार है। इसलिए नवविवाहित महिलाएं बिना किसी संकोच के इस व्रत को रख सकती हैं।

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*पं महेंद्र पाठक*
*पं मनीष पाठक*
*पं डॉ दीपेश पाठक व समस्त नगरपुरोहित परिवार, आष्टा*
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