

आष्टा। स्थानीय काछीपुरा में पं. भवानीशंकर शर्मा, गजेन्द्र शर्मा शास्त्री के निवास स्थान पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा परिसर भक्ति रस और धार्मिक भजनों की ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ उठाया और पूज्य महाराज श्री का पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन के दौरान पंडित कन्हैयालाल शर्मा के श्रीमुख से प्रवाहित संगीतमय एवं ज्ञानवर्धक श्रीमद्भागवत कथा ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। महाराज श्री ने अपने प्रसंगों में श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए

जीवन में सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूमते नज़र आए। पंडित श्री शर्मा ने राजा परीक्षित की कथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब महाराज परीक्षित को ऋषि शृंगी द्वारा यह श्राप मिला कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी तो सामान्य मनुष्य की तरह वे भयभीत होकर रोए नहीं, बल्कि उन्होंने इसे ईश्वर की परम अनुकंपा माना। सर्प केवल एक जीव नहीं, बल्कि हमारे जीवन में काल और मृत्यु का प्रतीक है। काल का सर्प हर क्षण, हर पल हम सभी की ओर बढ़ रहा है।

अंतर बस इतना है कि राजा परीक्षित को तो अपनी मृत्यु का दिन और समय पता था कि उनके पास केवल सात दिन हैं, लेकिन हमें तो यह भी नहीं पता कि हमारा अगला पल कौन-सा है। व्यास पीठ का पूजन कर लिया आशीर्वाद – कथा के दौरान नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा, पार्षद रवि शर्मा द्वारा श्रीमद्भागवत ग्रंथ एवं व्यास पीठ का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। पूजन के उपरांत श्रद्धालुओं ने पूज्य महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त कर क्षेत्र की सुख, समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा ने कहा कि हमारे सनातन धर्म और

पावन ग्रंथों का महात्म्य अतुलनीय है। इन पौराणिक कथाओं और धर्मग्रंथों के श्रवण मात्र से ही हम सभी को भगवान श्री कृष्ण एवं प्रभु श्री राम के इस धरा धाम पर अवतरण के वास्तविक महत्व और दिव्य उद्देश्यों का ज्ञान प्राप्त होता है। श्री मेवाड़ा ने कहा कि मेरे लिए यह अत्यंत सौभाग्य और भावुक कर देने वाला क्षण है। बचपन में पूज्य गुरुदेव के पावन सानिध्य में मुझे न केवल खेल और जीवन की सीख मिली, बल्कि उनके साथ मैदान पर क्रिकेट खेलने का असीम आनंद और अवसर भी प्राप्त हुआ और आज समय का यह सुंदर चक्र देखिए कि बचपन में खेल का पाठ पढ़ाने वाले वही पूज्य गुरुदेव आज अपने श्रीमुख से हमें सनातन धर्म, भक्ति और अध्यात्म की अमृतवाणी से सिंचित कर रहे हैं।

आष्टा । भगवान जगन्नाथ जी सात दिनों के विश्राम के बाद आज अपनी मौसी के घर आनंद धाम बुधवारा से अपने निवास प्राचीन बाँसबेडा जगदीश मन्दिर पहुचे । सभी भक्त भगवान को गाजे बाजे से भगवान को उनके निवास छोड़ने पहुचे । मौसी के घर पधारने के उपलक्ष्य में 7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन किया गया है । जिसका आज समापन हुआ । भागवत कथा के माध्यम से पंडित कन्हैयालाल शर्मा ने आज सुदामा चरित्र एवं राजा परीक्षित का मोक्ष विषय को लेकर अनेक कथाओं का विस्तार से वर्णन किया एवं सभी भक्तों को कथा का श्रवण कराया ।भागवत कथा में आज भवानी शंकर शर्मा, रायसिंह जी मेवाड़ा नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि, रवि शर्मा पार्षद, मनोज ताम्रकार, महेंद्र मालवीय,

मनोज बाकडें, जे पी नगरिया, उमेश बरेठा, नर्मदा मालवीय, भुरु नारायण मुकाती, देवकरण मालवीय,श्रीमती लता कल्लू मुकाती,दीपक सोनी, प्रेम नरायण शर्मा, हरियाणा शर्मा, मिट्ठू पुरा सरकार, दुर्गेश पाठक, मधुबाला पाठक,जगदीश ओमप्रकाश सोनी, जितेंद्र वैष्णव,मोना ठाकुर,ओम प्रकाश मिश्रा भोपाल , क्षमा शर्मा , जगदीश पाटीदार, बृजमोहन सोनी, शिव श्रीवादी, दीपेश गौतम, शीला शर्मा, राधा शर्मा,आनंद लछमी शर्मा, रमा प्रतिभा शर्मा गजेन्द्र शर्मा, चंद्रेश माधवी शर्मा, मधुराज आदि भक्तगण उपस्थिति रहे एवं भागवत का श्रवण किया गया। पंडित गजेंद्र शास्त्री धर्माधिकारी ने सभी नगर वासीयो,पत्रकारों का सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया ।




