संयुक्त जयंती पर उमड़ा जनसैलाब: “जय भीम” के नारों से गूंजा आष्टा नगर

आष्टा में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की संयुक्त जयंती के अवसर पर आष्टा नगर में अभूतपूर्व उत्साह और जनसमूह देखने को मिला। सकल हिन्दू समाज आष्टा के तत्वावधान में आयोजित भव्य रैली ने पूरे नगर को “जय भीम” के गगनभेदी नारों से गुंजायमान कर दिया।रैली की शुरुआत नगर के प्रमुख मार्गों से हुई, जिसमें समाज के सभी वर्गों—युवा, बुजुर्ग, महिलाएं एवं विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

हाथों में बैनर, झंडे एवं महान विभूतियों के चित्र लिए लोग सामाजिक एकता, शिक्षा और समानता का संदेश देते हुए आगे बढ़ते नजर आए।सिद्धार्थ चौराहे पर हुआ भव्य स्वागतरैली जब सिद्धार्थ चौराहे पहुंची, तब सकल हिन्दू समाज आष्टा द्वारा समाज बंधुओं एवं पदाधिकारियों का पुष्प वर्षा एवं माल्यार्पण कर भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाह एवं संयोजक मुकेश नामदेव के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ।इस दौरान राजीव गुप्ता (पत्रकार), मनीष डोंगरे,

जगदीश खत्री, मनोहर लाल विश्वकर्मा, मांगीलाल सिसोदिया, दिलीप मालवीय, देवकरण पहलवान, सुनील कचनेरिया, गुलाब बाई ठाकुर, संजय वर्मा (पत्रकार), मानसिंह परमार, निर्मल दास बैरागी, मोंटू कोरी, प्रेमनारायण जायसवाल, सुभाष नामदेव, सुनील कटारा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।अनुशासित एवं प्रेरणादायक रही रैलीरैली का नेतृत्व अध्यक्ष बापूलाल मालवीय एवं जगदीश द्रविड़ द्वारा किया गया। उनके मार्गदर्शन में रैली पूरी तरह अनुशासित एवं शांतिपूर्ण रही। नगर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों द्वारा रैली का स्वागत किया गया, जिससे आयोजन का उत्साह और भी बढ़ गया।वक्ताओं ने दिए प्रेरणादायक संदेशइस अवसर पर अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाह ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर एवं महात्मा फुले के विचार आज भी समाज को दिशा देने वाले हैं।

हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना चाहिए।वहीं संयोजक मुकेश नामदेव ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का कार्य करते हैं।अंबेडकर भवन पर हुआ समापनभव्य रैली का समापन कन्नौद रोड स्थित अंबेडकर भवन परिसर में हुआ, जहां उपस्थित जनसमूह ने महान विभूतियों को माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान समाज में शिक्षा, समानता एवं जागरूकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो वह न केवल अपने महापुरुषों का सम्मान करता है, बल्कि उनके आदर्शों को भी जीवंत रखता

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