
आष्टा- जन नायक सर्व समाज संगठन के केंद्रीय व प्रांतीय नेतृत्व की सहमति से संगठन का विस्तार करते हुए विजय सोलंकी को सीहोर जिले का नया जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस घोषणा के बाद से ही स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह और खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने विजय सोलंकी की समाज के प्रति गहरी निष्ठा, सक्रियता और सांगठनिक कौशल को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है। नेतृत्व को पूरा विश्वास है कि उनके मार्गदर्शन में सीहोर जिले में संगठन को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा सर्व समाज के कल्याण के लिए पूरी ऊर्जा के साथ कार्य किया जाएगा।

अपनी नियुक्ति पर हर्ष व्यक्त करते हुए नवनियुक्त जिला अध्यक्ष विजय सोलंकी ने कहा, “संगठन के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ उस पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा। मेरा मुख्य उद्देश्य सीहोर जिले में समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोकर साथ चलना, उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाना और संगठन की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाना है। हम सब मिलकर क्षेत्र के विकास और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य करेंगे।”

इस दौरान आष्टा और सीहोर पहुंचने पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, मित्रों और संगठन के तमाम कार्यकर्ताओं ने विजय सोलंकी का भव्य स्वागत किया। सभी ने उन्हें पुष्पमाला पहनाकर और मिठाई खिलाकर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समर्थकों को पूर्ण विश्वास है कि उनका यह कार्यकाल ऐतिहासिक और समाज हित में एक मील का पत्थर साबित होगा। समर्थकों ने जिला अध्यक्ष बनने पर वृक्षारोपण किया गया जिसमें उपस्थित। यशवंत मालवीय,अखिलेश मालवीय, सचिन भीष्म अभिषेक गुणवान, शुभम ,महेश , आदि रहे।

आष्टा। नगर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले श्री गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव का शुभारंभ इस वर्ष भी पूर्व वर्षों की अपेक्षा अधिक श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ कृष्ण धाम आश्रम, मालीपुरा में हुआ। परम पूज्य सद्गुरु मां कृष्णा जी के पावन सानिध्य एवं मुखारविंद से प्रवाहित दिव्य सत्संग का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। विशेष रूप से मातृशक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक आध्यात्मिक एवं गरिमामय बना दिया। सद्गुरु मां कृष्णा जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य के जीवन का वास्तविक पथप्रदर्शक होता है।

गुरु के सानिध्य से जीवन में संस्कार, सेवा, भक्ति और आत्मिक शांति का संचार होता है। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजन, कीर्तन एवं सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया।
इस पावन अवसर पर सकल हिंदू समाज अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद नरेंद्र कुशवाहा ने अपने साथियों के साथ परम पूज्य सद्गुरु मां कृष्णा जी का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री कुशवाहा ने कहा कि गुरु भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के आधार स्तंभ हैं। गुरु का सानिध्य समाज को सदाचार, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करता है। उन्होंने नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में श्री गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव में सहभागी होकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया।

इस अवसर पर सकल हिंदू समाज के मीडिया प्रभारी राजीव गुप्ता, संजय वर्मा, मोंटू कोरी, मनोहर विश्वकर्मा एवं शैलेंद्र शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने बताया कि श्री गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव 25 जुलाई से 29 जुलाई तक विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न होगा। इसी क्रम में 28 जुलाई प्रातः 9:00 बजे नगर के प्राचीन गायत्री मंदिर से परम श्रद्धेय सद्गुरु मां कृष्णा जी के पावन सानिध्य में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। आयोजन श्री कृष्णा भक्त मंडल एवं ब्रह्मानंद जन सेवा संघ, आष्टा के तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजकों ने नगर के समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों से श्री गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की।

आष्टा। जब व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के संचित पुण्य का उदय होता है। तब श्रीमद् भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। भगवान की कथा बहुत दुर्लभ है। संत समागम हरि कथा जग में दुर्लभ दोई। सुत, दारा, लक्ष्मी पापी के भी होई। भगवान की कथा से जीव की व्यथा मिटती है। उक्त बहुत ही सारगर्वित विचार माता मंदिर चौक भंवरा में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस परम भागवत भूषण संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार द्वारा व्यक्त किए गए। आगे संत श्री द्वारा श्रीमद् भागवत और सत्संग के महत्व पर बड़े ही विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया की श्रीमद् भागवत कथा जीव को जगदीश से जोड़ने वाली कथा है।

भागवत कथा 7 दिन में मोक्ष की गारंटी देने वाला एकमात्र पुराण है। भागवत सुनने से प्रेत को भी मुक्ति प्राप्त हुई है। पाराशर नंदन वेदव्यास जी द्वारा यह दिव्य ग्रंथ जिसमें 335 अध्याय 12 स्कंध और 18000 श्लोक हैं। इस भागवत कथा के सुनने से महान सत्यवादी परम प्रतापी राजा परीक्षित को 7 दिन में मोक्ष की प्राप्ति हुई। और धुंधकारी जैसे पापी को भी 7 दिन की कथा सुनने से भगवत धाम प्राप्त हुआ। यह देवताओं के लिए भी दुर्लभ ग्रंथ है। आप सब परम भाग्यशाली है। जिन को सहज ही भागवत कथा श्रवण का परम सौभाग्य मिल रहा है। पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजन मोर तेही भाव ना काऊ।

आपके ऊपर इलाई माता की विशेष कृपा है। राम कृपा बिना सुलभ न सोई। तुलसीदास जी लिखते हैं। तुलसी इस संसार में पांच रतन है सार। संत मिलन और हरि भजन दया दान उपकार। इसके साथ ही सुखदेव जी जन्म की कथा, देव ऋषि नारद जी के पूर्व जन्म की कथा, ज्ञान भक्ति वैराग्य के पावन प्रसंग के साथ ही परम भागवत गोकर्ण जी की कथा के साथ ही श्रीमद् भागवत कथा के अनेक गुढ रहस्यो का उद्घाटन किया। जिसे सुनकर सारे श्रोताओं ने

भक्ति में सराबोर होकर झूम झूम का नृत्य किया। कथा से पूर्व एक संक्षिप्त कलश यात्रा माता जी के मंदिर कथा स्थल तक मुख्य यजमान अशोक साहू द्वारा भागवत पोथी सिर पर रखकर लाये और व्यास गादी पर विराजमान किया। प्रसाद अशोक जी साहू की ओर से वितरित किया गया। इस अवसर पर मनोहर लाल शर्मा, अशोक साहू, हरिनारायण परमार, देवी सिंह परमार, गोरेलाल परमार, राजेंद्र जैन, कृपाल सिंह, सागरमल जैन, हरि सिंह नेताजी, गोल्डी सेठ, मनोज भैया, नितेश सेन, सहित बड़ी संख्या में माता बहने उपस्थित रही।

भगवान जगन्नाथ सात दिवसीय विश्राम एवं श्रीमद्भागवत कथा के समापन उपरांत भव्य शोभायात्रा के साथ अपने मंदिर पधारे

आष्टा। आष्टा नगर की पावन पार्वती नदी के तट स्थित प्राचीन बांसवाड़ा मंदिर से भगवान श्री जगन्नाथ जी अपनी मौसी के घर आनंद धाम में सात दिवसीय विश्राम हेतु विराजमान हुए थे। इस पावन अवसर पर परम श्रद्धेय पंडित श्री कन्हैयालाल शर्मा के श्रीमुख से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ भव्य समापन हुआ।समापन के पश्चात भगवान श्री जगन्नाथ जी की दिव्य एवं भव्य शोभायात्रा आनंद धाम से बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों,

जयघोष एवं भजन-कीर्तन के बीच प्रारंभ हुई। नगर के श्रद्धालु पूरे मार्ग में पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करते हुए जय जगन्नाथ के उद्घोष से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई पुनः भगवान श्री जगन्नाथ जी को उनके पावन निवास प्राचीन बांसवाड़ा मंदिर, पार्वती नदी तट लेकर पहुँची।मंदिर पहुंचने पर पंडित धर्माधिकारी गजेंद्र शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा का विधि-विधान से पूजन, अर्चन एवं महाआरती संपन्न कराई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

इस पावन अवसर पर सकल हिंदू समाज अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद नरेंद्र कुशवाहा ने भगवान श्री जगन्नाथ जी की आरती कर श्रीफल अर्पित किया तथा नगर, प्रदेश और समस्त मानव समाज के सुख, शांति, समृद्धि एवं कल्याण की मंगलकामना करते हुए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।शोभायात्रा एवं धार्मिक आयोजन में पंडित भवानी शंकर शर्मा, बाबू शर्मा, सकल हिंदू समाज महामंत्री दिलीप मालवीय, पूर्व पार्षद शैलेश राठौर, मनोज ताम्रकार, महेंद्र मालवीय, उमेश बरेठा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ा,पार्षद रवि शर्मा, मनोज बाकड़े, हरिनारायण शर्मा, कथावाचक कुबेर सिंह “मिट्ठू सरकार”, दुर्गेश पाठक, प्रेम नारायण शर्मा, जगदीश ओमप्रकाश सोनी, मोना ठाकुर, शिव श्रीवास्तव, दीपेश गौतम, बृजमोहन सोनी, जगदीश पाटीदार सहित अनेक धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मातृशक्ति की भी उल्लेखनीय सहभागिता रही। क्षमा शर्मा, शीला शर्मा, राधा शर्मा, आनंद लक्ष्मी शर्मा, रमा शर्मा, प्रतिभा शर्मा, चंद्रेश माधवी शर्मा सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भगवान श्री जगन्नाथ की शोभायात्रा एवं महाआरती में सहभागी होकर आयोजन को भक्तिमय एवं भव्य स्वरूप प्रदान किया।सात दिनों तक आनंद धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान किया। कथा समापन के उपरांत भगवान श्री जगन्नाथ जी का अपने पावन धाम में पुनः आगमन नगरवासियों के लिए आस्था, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम बन गया।