
आष्टा। अखिल भारतीय जैन श्वेतांबर सोशल ग्रुप फेडरेशन से संबद्ध जैन सोशल ग्रुप, आष्टा के वर्ष 2026-27 के लिए अक्षय सलोनी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चयनित किया गया है। जैन सोशल ग्रुप एक युवा कपल (युगल) ग्रुप है, जो समाज में सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा कार्यों के माध्यम से सकारात्मक भूमिका निभा रहा है। आष्टा इकाई पिछले 14 वर्षों से विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश कोठारी हैं। इस अवसर पर निवर्तमान अध्यक्ष यश प्रिया श्रीश्रीमाल के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा गया कि उनके नेतृत्व में संस्था ने अनेक उल्लेखनीय गतिविधियों का सफल आयोजन किया।

उनके कार्यकाल को सफल बनाने में उनकी पूरी टीम दीपेश-वैशाली सिंगी, अमर-नेहा कोचर, अमित-पूर्णिमा रूनवाल, प्रवीण-जया वोहरा , प्रफुल्ल तमन्ना चोरडिय़ा तथा विशाल-अंजलि पारख का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। नवनिर्वाचित अध्यक्ष अक्षय सलोनी ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे सभी साथियों के सहयोग से संस्था की सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा गतिविधियों को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाएंगे। अक्षय सलोनी के अध्यक्ष बनने पर रीना-पवन सुराना, मनीष-सोनल चोरड़िया, कुलदीप-मोना कोचर, अभिषेक-दीपा सुराना, राहुल-महिमा सुराना, नरेंद्र-सीमा चतरमूथा, तरुण-सोनम चतरमूथा , अतुल अपेक्षा चतर मुथा सहित समाज के अनेक सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

आष्टा- ब्रह्मानंद जन सेवा संघ, मां कृष्णा धाम मालिपुरा आष्टा के पावन तत्वावधान में और परम पूज्य कृष्णा माँ के पावन सानिध्य मे आयोजित पांच दिवसीय गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के द्वितीय दिवस पर आज अनेकों गुरु भक्तों ने दिव्य सत्संग का लाभ लिया महोत्सव मे आज उत्तर प्रदेश, राजस्थान,महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों से पधारे हजारों गुरु भक्तों ने पूज्य कृष्णा माँ के सत्संग का लाभ लिया आज के सत्संग में, अखिल भारतीय जूना गुजराती दर्जी समाज कड़छा ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित जी चौहान, शौर्य समिति के अध्यक्ष एवं

सभी सदस्यों ने कृष्णा माँ का स्वागत कर उनका पावन आशीर्वाद लिया श्रद्धेय कृष्णा माँ ने आज के सत्संग में कई जीवन उपयोगी सूत्र बताएं! कृष्णा मां ने अपनी अमृतमय ओजस्वी वाणी में कहा कि :-1जैसे फूलों से खुशबू अलग नहीं है,जैसे तिल से तेल अलग नहीं है, जैसे चकमक से आग लग नहीं है ठीक वैसे ही भगवान भी हमसे अलग नहीं है हम भगवान के ही अंश है सतगुरु हमेशा अपने शिष्यों का कल्याण चाहते है सतगुरु हमारे अंदर क्या चल रहा है वह भी पढ़ लेते हैं मनुष्य ऋषियों की संतान है 2 आगे सत्संग में बताया कि, गलती करो किंतु गलतियां मत करो क्योंकि भगवान गलती को तो माफ कर सकते हैं किंतु गलतियां माफ़ नहीं करते हैंशिशुपाल

की भगवान कृष्ण ने गलती तो माफ कर दी थी किंतु जब बहुत सारी गलतियां करने लगा और जैसे ही 100 गलती हुई भगवान ने शिशुपाल का वध कर दिया 3 आज के समय में हर कोई सिर्फ बोलने में लगा है सुनने वाले बहुत कम है आज अधिकतर जो वक्ता बोलते है वह बात उसके अनुभव और आचरण में नहीं होती है इसलिए सुनने वाले पर इसका असर नहीं होता है ऐसा व्यक्ति जो रटा हुआ बोलता है उसकी बातें श्रोता के सिर्फ कानों तक पहुंचती है जो व्यक्ति अनुभव से बोलता है उसकी बातें ह्रदय तक पहुंचती है और श्रोता के अंदर परिवर्तन आता है किंतु जो व्यक्ति परावानी से बोलता है

उसकी वाणी ब्रह्मांड में प्रसारित होती रहती है संत हमेशा परावानी से बोलते है 4 जिस व्यक्ति के अंदर श्रद्धा होती है वह व्यक्ति सब कुछ पा लेता है बिना श्रद्धा भाव के किया गया कार्य फलिभुत नहीं होता इसीलिए कहा है कि:- श्रद्धावान लभते ज्ञानम!! 5 यदि व्यक्ति के जीवन में गुरु और भगवान का साथ हो तो कितनी भी बड़ी मुसीबतें आए वह राई जैसी छोटी होकर घटित हो जाती है जो सतगुरु और भगवान के सानिध्य में रहता है उसकी हर प्रतिकूल परिस्थिति अनुकूलता में बदल जाती है मनुष्य के प्रारब्ध में लिखी समस्या तो आएगी किंतु वह सूक्ष्म रूप मे असर करेगी।

आष्टा। प्रसन्न रहने का एक सीधा सा मंत्र है। कौन क्या कर रहा है। कैसे कर रहा है क्यों कर रहा है। इन बातों से जितना दूर रहोगे, आप उतने ही शांत और प्रसन्न रहोगे। सभी को खुश कर पाना हमारे लिए संभव नहीं है। पर हमारी वजह से किसी को तकलीफ ना हो यह संभव है। आदत अपनी सुधार लो बस हो गया भजन। मन की तरंगे मार लो बस हो गया भजन। उक्त बहुत ही सारगर्भित संदेश मालवा क्षेत्र के सुप्रसिद्ध भागवत कथाकार संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार द्वारा भंवरा में चल रही सात दिवसीय संगीत मय श्रीमद्

भागवत कथा के तृतीय दिवस दिया गया। आगे महाराज श्री द्वारा आज की युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए सुनाया। की आज का युवा भ्रमित है। बिना मेहनत अल्प समय में ही सफलता प्राप्त करना चाहता है। एकमात्र उद्देश्य ऐन केन प्रकारेण धन अर्जन हो गया। संकल्प शक्ति का अभाव आज के हर युवा में देखा जा रहा है। यदि आप में दृढ़ इच्छा शक्ति है। तो कुछ भी असंभव नहीं है।कौन कहता है। आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो दिल से उछालो यारो। अभी वर्तमान में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके इसका ताजा उदाहरण है।

किसी शायर ने कहा है। मंजिलें उन्हीं को मिलती है। जिनके सपनों में जान होती है।पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इसके साथ ही ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि के निर्माण की कथा का बड़े ही विस्तार से वर्णन किया। मनु शतरूपा जी के संपूर्ण वंश का वर्णन करते हुए सुनाया। की मनु महाराज की पांच संताने हुई। जिसमें तीन बेटी और दो बेटे। बेटियों में क्रमशः आकूति, देवहूति और प्रसूति और पुत्र उत्तानपाद और प्रियव्रत। इस कथा से स्पष्ट होता है। कि बेटियों की संख्या यहां पर पहले से ही ज्यादा थी।बेटी

को अभिशाप नहीं माना जाता था। बेटी भगवान का वरदान है। हिंदू शास्त्र में बेटी को देवी माना गया है। यह पूजनीय है। शास्त्रो मैं भी लिखा है। यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता। जिस घर में माता बहनों का सम्मान होता है उस घर में ही देवताओं का वास होता है। आज चतुर्थ दिवस भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर शंकर लाल जायसवाल दीवडीया , बाबूलाल सरपंच सिया खेड़ी, देवी सिंह छापर, प्रहलाद सिंह परमार, मनोहर शर्मा, श्याम टेलर, नितेश ठाकुर,द्वारा गुरुदेव का सम्मान किया।

