
आष्टा- नवरात्रि के पावन पर्व की आहट के साथ ही सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सवों का दौर शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में नगर का बहुप्रतीक्षित और लोकप्रिय आयोजन ‘ढोली थारो गरबा रास 6.0’ एक बार फिर से गरबा रास प्रेमियों के लिए तैयार है। यह शानदार आयोजन 15 और 16 अक्टूबर को भगवती पैलेस में संपन्न होगा। नई कार्यसमिति का गठन और स्वागत समारोह आयोजन को और अधिक भव्य और व्यवस्थित रूप देने के लिए MP37 इवेंट्स समिति का गठन किया गया है, जिसमें अध्यक्ष पद पर श्रीमती मोना राजेश मेवाड़ा एवं उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह दरबार नियुक्त हुए। समिति के गठन के पश्चात वेन्यू पार्टनर भगवती पैलेस में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का भव्य स्वागत और सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

परंपरा को जीवंत रखने का संकल्प- इस अवसर पर नवनियुक्त अध्यक्ष मोना जी मेवाड़ा और उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह दरबार ने संयुक्त रूप से कहा कि हमारी सनातन धार्मिक परंपराओं और संस्कृति को संजोए रखने के लिए समिति पिछले 6 वर्षों से लगातार यह आयोजन कर रही है। इस वर्ष भी सभी के अभूतपूर्व सहयोग से इस आयोजन को बेहद अनुशासित और भव्य रूप से संपन्न कराया जाएगा। इस आयोजन में समिति के अंकुश सोनी, विनय वर्मा, अंशु कुशवाहा, रितिक धवल, गौतम शर्मा, जयदीप माहेश्वरी, अंकुर खंडेलवाल, बलवीर ठाकुर, बाबू राठौर, शिवम सोनी, कुलदीप ठाकुर, भूपेंद्र ठाकुर, योगेंद्र ठाकुर, लोकेन्द्र ठाकुर, विकास जैन, सुजल खत्री, आर्यन यादव, शिवम भटनागर आदि सदस्य अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

“गरबा सिर्फ एक नृत्य नहीं, हमारी आस्था, संस्कृति और उल्लास का प्रतीक है। मां अम्बे की आराधना के इस पावन पर्व पर ‘ढोली थारो गरबा रास 6.0’ के माध्यम से हम सभी को अपनी प्राचीन परंपरा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। भगवती पैलेस में होने वाले इस भव्य आयोजन को आप सभी के सहयोग और अनुशासन से इस बार और भी अधिक ऐतिहासिक और दिव्य बनाया जाएगा। आइए, इस सांस्कृतिक महाकुंभ में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर गरबा रास की इस खूबसूरत परंपरा को और ऊंचाई दें।”
— मोना मेवाड़ा (अध्यक्ष, MP37 इवेंट्स / ढोली थारो गरबा रास समिति 2026)
तीर्थंकरों की वाणी जिनवाणी होती है, जिनवाणी को रोम रोम में बसा लो बेड़ा पार हो जाएगा-पूज्य कीर्ति सुधा जी महाराज साहब श्रावक संघ बेरछा पहुंचा, अगले वर्ष का चातुर्मास आष्टा में करने की विनती का पत्र साध्वी मंडल के चरणों में किया समर्पित

आष्टा । आज सांसारिक जीव जो भी धर्म कार्य करता है ,उसके पीछे उसका यह हित होता है कि इस किये धर्म से मुझे लाभ हो,मेरा हित हो, तीर्थंकरों की वाणी जिनवाणी होती है। तीर्थंकरों की वाणी कर्मों से मुक्त करने वाली होती है । जिनवाणी कर्मों को चकनाचूर करने वाली है जो जिनवाणी को समझ जाए निश्चित मानिए उसका जीवन तर जायेगा।जिनवाणी को रोम -रोम में बसा लो सब का बेड़ा पार हो जाएगा। उक्त उद्गार बेरछा स्थित स्थानक भवन में चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य साध्वी श्री कीर्ति सुधा जी महाराज साहब ने उपस्थित श्रावक-श्राविकओं को

आशीष वचन के माध्यम से कहे । इस अवसर पर श्रावक संघ आष्टा द्वारा पूज्य साध्वी जी श्री कीर्ति सुधा जी महाराज साहब के चातुर्मास की विनती का पत्र साध्वी मंडल के चरणों में समर्पित किया। प्रवचन के दौरान पूज्य महाराज श्री कीर्ति सुधा जी महाराज साहब ने कहा कि आज व्यक्ति साधना,धर्म आराधना कर रहा है उसके पीछे भी उसकी अभिलाष भौतिक लाभ और सुख पाने की रहती है । व्यक्ति यह भूल जाता है कि आज उसे जो अनमोल मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है ।जो सुख, संपदा, धन ,शांति प्राप्त हुआ है वह पूर्व में किए गए धर्म के कारण और उसके पुण्यों के उदय से मिले हैं ।

वर्तमान में हमारी धर्म साधना ऐसी हो कि धर्म आपको रोग रहित तन दे, टेंशन रहित मन दे। कर्म व्यक्ति को बुद्धि से मंदबुद्धि भी बना देता है और मंद बुद्धि से बुद्धिमान भी बना देता है। कर्म ऐसे नाच नचाता है । कर्मो को लेकर साध्वी जी ने तीन बातें बताई ।उन्होंने कहा की कर्म कहां रहते हैं, कर्म किसको देखते हैं,कर्म क्या करते हैं को लेकर पूज्य महाराज श्री ने कई उदाहरण देकर के सभी श्रावक – श्राविकाओं को बताया कि जब व्यक्ति चिंता में रहता है तो उसे कुछ नहीं दिखता है।कभी छोटा सा किया धर्म भी बड़ा फल दे देता है । कभी भी छोटे को छोटा मत समझो । जैसे दूध में घी नहीं दिखता है, वैसे ही कर्म नहीं दिखते है ।

जिस प्रकार मोमबत्ती को जलाने के बाद उसके उजाले में उजाला सबको दिखता है, वैसे ही कर्म सबको देखते हैं। कर्म राजा को रंक बना सकता है और रंक को राजा भी बना देता है । कर्म को समझे । कर्म तीनों लोकों में नाच नचाता है । कर्म तीर्थंकरों को भी नहीं छोड़ते हैं । इसलिए तीर्थंकरों की वाणी जिनवाणी है और ये कर्मो को मुक्त करने वाली वाणी है। इस अवसर पर स्थानकवासी श्रावक संघ के अध्यक्ष लोकेंद्र बनवट, चातुर्मास समिति के संयोजक आनंद रांका, साधना रांका एवंसाधना वेदमुथा ने अपने उद्गार व्यक्त कर आष्टा में चातुर्मास की स्वीकृति देने की विनती की,

वहीं दूसरी ओर नमिता बोथरा नेभजन के माध्यम से आष्टा चातुर्मास हेतु आग्रह किया।इस अवसर पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष लोकेंद्र बनवट एवं चातुर्मास समिति के संयोजक आनंद रांका, श्रीमती साधना रांका सहित उपस्थित सभी श्रावक श्राविकाओं ने पूज्य महाराज श्री का वर्ष 2027 का चातुर्मास आष्टा में करने हेतु विनती पत्र साध्वी मंडल के चरणों में समर्पित किया। चातुर्मास की विनती करने के लिए काफी संख्या में आष्टा से समाज के श्रावक श्राविका साध्वी जी के समक्ष बेरछा पहुंचे थे।
