साहित्य शिल्पी की सरस काव्य निशा अतुल जैन सुराणा के निवास एम.टेक. कम्प्यूटर पर हुई सम्पन्न

आष्टा (नि.प्र.) – नगर के प्रबुद्ध साहित्यकारों की संस्था साहित्य शिल्पी की सरस काव्य निशा संस्था के संस्थापक सदस्य कवि अतुल जैन सुराणा के निवास एम.टेक. कम्प्यूटर पर सम्पन्न हुई। जिसमें संस्था के कवियों ने पर्यावरण दिवस की विशेष रचनाओं के पाठ के साथ वरिष्ठ शायर बशीर बद्र के निधन पर अपनी कविताओं के माध्यम से उन्हें श्रृद्धाजंलि भी अर्पित की।सर्वप्रथम संस्था के संरक्षक श्रीराम श्रीवादी द्वारा सस्वर सरस्वती वंदना के साथ काव्य निशा का आरंभ हुआ, जिसमें उन्होनें ‘‘हे शारदे श्वेताम्बरी साहित्य को वरदान दे।‘‘ पंक्तियों के साथ मां शारदा का आव्हान किया

तत्पश्चात् कुशल वक्ता जुगल किशोर पवार द्वारा वरिष्ठ शायर बशीर बद्र को श्रृद्धाजंलि अर्पित करते हुये उनकी कुछ गजलों का पाठ किया गया तथा उनका प्रसिद्ध शेर ‘‘ लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में’’ पढ़ा गया। अपने क्रम में वरिष्ठ कवि ललित बनवट ललित द्वारा चिन्तनशील उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ करते हुये कहा गया कि ‘‘उम्र बिना रूके सफर कर रही है, और हम रूककर वहीं खड़े हैं।’’ आयोजन का संचालन कर रहे कवि अतुल जैन सुराणा नें अपने क्रम में वरूण देव और प्रकृति का आव्हान करते करते हुये कहा कि ‘‘जलती तपती वसुंधरा को हे प्रकृति अपना उपहार दो, वर्षा की अमृत बूंदो की शीतल पावन रसधार दो।’’

संस्था के अध्यक्ष महोदय डॉ. कैलाश शर्मा नें अपनी वजनदार गजल पढ़ते हुये कहा कि ‘‘कितने दुखी हैं हम तुम्हें ये आज बतायेगें, औरो से मत जानियेगा वे तो दगाबाज बतायेगें।’’ सबरंग कवि दिलीप संचेती नें व्यंग्यात्मक ताजा रचना पढ़ते हुये कहा ‘‘दिल से दिल मिले तो दिलदार हो गये, और उधारी वापस मांगी तो वो फरार हो गये।’’ कजलास से पधारे हुये पैरोडीकार मूलचंद धारवां नें पर्यावरण दिवस पर अपनी रचना प्रस्तुत कर अपनी उपस्थिति को सार्थक किया, उन्होनें कहा कि ‘‘सांसे हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाये हम। बरगद एक लगाईये पीपल लगायें पांच, आने न पाये इस पृथ्वी पर आंच’’।

संस्था के हास्य बम गोविन्द शर्मा ने अपने चुटीले अंदाज में हास्य क्षणिकाओं को प्रस्तुत कर माहौल को ठहाको से भर दिया। उन्होनें अपनी हास्य रचना में कहा कि ‘‘कौन मरेगा हम पर बोलो, कौन रोज श्रृंगार करें, गाल पोपले जर्जर ढांचा, कोई क्यों बूढ़ो से प्यार करें।।’’ अंतिम कवि के रूप में नगर के प्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं कवि श्रीराम श्रीवादी नें अपने सस्वर गीत और गजलो से समां बांध दिया। उन्होनें मेरे विद्यालय विषय पर हृदय को छूने वाले गीत के माध्यम से कहा कि ‘‘हमें सबकुछ दिया अच्छा हमारे प्रिय विद्यालय नें, हमें जीवन दिया सच्चा हमारे प्रिय विद्यालय नें।’’अंत में आभार आयोजक कवि द्वारा व्यक्त करते हुये आयोजन का समापन हुआ।

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