गौत्र परम्परा में वैज्ञानिकता निहित है- कैलाश परमार पूर्व नपाध्यक्ष

कड़ौदिया सेन समाज का एक प्रमुख गौत्र है इस गौत्र के भेरू महाराज एवं सती माता वर्षों पूर्व से सांदीपनि सी एम राइज स्कूल आष्टा के प्रांगण में वर्षों पूर्व से स्थापित है सेन समाज एवं कड़ौदिया गौत्र के अनुयायियों ने आज भेरू महाराज एवं सती माता का प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम पूर्ण धार्मिक विधान से स आनंद संपन्न किया सामाजिक बंधुओं और भगिनियों ने अपने आराध्य की पूजा अर्चना पूर्ण मनोयोग से कर आमंत्रित अतिथियों का सम्मान किया , प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी सदस्य पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार का सेन समाज के

पदाधिकारियों ने सम्मान कर उन्हें सेन समाज के नाम से उनके कार्यकाल में चोराहे के नाम कारण हेतु आभार व्यक्त किया, पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार ने कहा कि सनातन हिन्दू धर्म की सभी जातियों में अलग अलग गौत्र है, आज कड़ौदिया गौत्र के लोगों ने अपने भेरू महाराज तथा सती माता की प्राण प्रतिष्ठा कर अनुकरणीय कार्य किया है, गौत्र के निर्धारण से वंशानुक्रम गुणों में वृद्धि होती है अर्थात गौत्र परम्परा वैज्ञानिकता से परिपूर्ण है, पूर्व नपाध्यक्ष परमार ने उनके स्वागत हेतु समाज का आभार व्यक्त किया है

मोहर्रम आयोजन समितियों का पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार ने किया स्वागतमोहर्रम पवित्र पर्व, त्याग सब्र, इंसानियत और भाईचारे का संदेश देता है। कर्बला के शहीदों की कुर्बानी हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इसी भावना के साथ आष्टा नगर में मोहर्रम पर्व को धार्मिक रीति-रिवाज और शांतिपूर्ण माहौल में मनाने हेतु मोहर्रम समितियों का परम्परा अनुसार गठन किया गया है।इसी क्रम में जुम्मापुरा तथा अलीपुर ,काजीपुरा मोहर्रम समिति भी गठित हुई है। जुम्मापुरा कमेटी के अध्यक्ष शेख उबैज तथा

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अलीपुर कमेटी के अध्यक्ष इरशाद मंसूरी, उपाध्यक्ष अनवर मंसूरी मनोनीत किए गए।नवनिर्वाचित समितियों का प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी सदस्य एवं पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष कैलाश परमार के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया। कमल सेठ, सुरेंद्र सिंह परमार, वीरेंद्र सिंह परमार, अर्जुन सिंह अजय, अपूर्व जैन, अखिलेश पांड्या सहित साथियों ने साफा बांधकर मोहर्रम समितियों का सम्मान किया।इस अवसर पर श्री परमार ने कहा, मोहर्रम केवल एक मातमी पर्व नहीं है। यह हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद दिलाता है जिन्होंने जुल्म के आगे सिर नहीं झुकाया।

उनका त्याग हमें सिखाता है कि हक और इंसाफ के लिए सबसे बड़ी कुर्बानी भी छोटी है। यह पर्व हमें जाति, धर्म से ऊपर उठकर मानवता की सेवा का पाठ पढ़ाता है।समिति अध्यक्षों एवं अन्य पदाधिकारियों ने स्वागत से अभिभूत होकर पूर्व नपा अध्यक्ष कैलाश परमार का आभार प्रकट किया और पर्व को आपसी सौहार्द एवं प्रशासन के सहयोग से मनाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम में युवा समाजसेवी फैजुद्दीन, तोषिफुद्दीन, तौफ़ीक़ खां, नौशे खां, नवाब बेरी, नफीस शाह, सईद टेलर, फिरोज भाई समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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