मुल्लानी मंगलपुर के अजय परमार ने तय किया संघर्ष से सफलता का सफर- प्राइवेट फाइनेंस की नौकरी से लेकर ISCL तक का रोमांचक सफर

सीहोर- मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के एक छोटे से गांव ‘मुल्लानी मंगलपुर’ के रहने वाले अजय परमार (पिता- कैलाश परमार) ने अपनी मेहनत और अटूट लगन के दम पर टेनिस क्रिकेट की दुनिया में एक मिसाल कायम की है। संसाधनों की कमी, 12वीं में असफलता और नौकरी के भारी दबाव के बावजूद अजय ने अपने क्रिकेटर बनने के सपने को टूटने नहीं दिया। आज उनका चयन देश के सबसे बड़े टेनिस क्रिकेट टूर्नामेंट ISCL (इंडियन स्ट्रीट क्रिकेट लीग) में मध्य प्रदेश की टीम के लिए हुआ है।

बचपन की जिद और संघर्ष के दिन- गांव की धूल भरी पगडंडियों और मैदानों से क्रिकेट की शुरुआत करने वाले अजय का बचपन सिर्फ एक ही सपने के साथ बीता—क्रिकेटर बनना। संसाधनों के अभाव के बावजूद उनकी खेलने की जिद कभी कम नहीं हुई। परिवार की डांट और समाज के ताने भी उन्हें रोक नहीं पाए। आष्टा और सीहोर के लोकल मैदानों पर गेंदबाजी करते-करते क्रिकेट उनका नशा बन गया। इस क्रिकेट के जुनून का असर यह हुआ कि वह 12वीं की परीक्षा में फेल हो गए। इसके बाद ताने और बढ़ गए, और तभी कोरोना महामारी का लॉकडाउन आ गया, जिससे उनके सपने थमते नजर आए।

इंदौर आकर नौकरी और क्रिकेट का तालमेल- लॉकडाउन खुलने के बाद उम्र बढ़ने और परिवार के दबाव के चलते अजय भविष्य की तलाश में इंदौर आ गए। यहां उन्हें प्राइवेट फाइनेंस में नौकरी मिल गई। दिनभर ऑफिस में फाइलों के बीच लोन और नौकरी का भारी दबाव रहता, लेकिन उनका दिल आज भी 22 गज की पिच पर ही बसता था। उन्होंने नौकरी के साथ-साथ सुबह-शाम क्रिकेट अभ्यास करना नहीं छोड़ा।

टेनिस क्रिकेट सर्किट में गूंजा नाम- अपनी कड़ी मेहनत के दम पर अजय ने जल्द ही इंदौर के टेनिस क्रिकेट सर्किट में अपनी पहचान बना ली। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के बाद उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से ऑल इंडिया टूर्नामेंट्स के बुलावा आने लगे। एक समय तो ओडिशा में मैच खेलने जाने के लिए उन्हें अपनी नौकरी से छुट्टी को लेकर भारी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि उनके लिए उनका जुनून सर्वोपरि था।

MPTCL में चमके और बने ‘बेस्ट बॉलर’- मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टूर्नामेंट MPTCL में अजय ने हिम्मत जुटाकर ट्रायल दिया। उनका चयन हुआ और उन्होंने अपने पहले ही सीज़न में घातक गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए ‘बेस्ट बॉलर ऑफ़ द टूर्नामेंट’ का खिताब अपने नाम किया। इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। मंज़िल: देश का सबसे बड़ा टूर्नामेंट ISCL- अजय का सबसे बड़ा सपना देश के सबसे बड़े टेनिस क्रिकेट टूर्नामेंट ISCL (जिसे टेनिस क्रिकेट का आईपीएल कहा जाता है) में खेलना था। उन्होंने इसके लिए भी कठिन ट्रायल दिए और अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

आखिरकार वह ऐतिहासिक पल आ गया, जब फाइनल चयन सूची में मध्य प्रदेश की टीम के लिए अजय परमार का नाम शामिल हुआ। सीहोर के एक छोटे से गांव के गुमनाम रास्ते से लेकर 12वीं फेल होने के ताने सुनने, मणप्पुरम फाइनेंस में फाइलें संभालने और अंततः देश के सबसे बड़े मंच तक पहुंचने का यह सफर यह साबित करता है कि “अगर इरादों में रफ्तार हो, तो कोई भी रुकावट आपकी मंजिल नहीं रोक सकती।” अजय परमार की यह कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है कि विषम परिस्थितियों में भी हार न मानकर अपने सपनों को कैसे सच किया जा सकता है।

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