तपोभूमि देव बड़ला मे श्रवण मास के चतुर्थ सोमवार पर उमड़ा श्रद्धा का शेलाब

मां नेवज नदी के उद्गम स्थल व पुरातत्विक धरोहर देवांचल धाम देव बड़ला बीलपान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह भगतजी ने बतायाशिव तत्व विचार जीवन में काम पर विजय प्राप्त करना अति कठिन है। भगवान शिव इसलिये भी देवों के देव महादेव हैं क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में काम को भस्म किया है। अधिकतर देव काम के अधीन हैं पर भगवान शिव राम के अधीन हैं। भगवान महादेव के जीवन में वासना नहीं, उपासना है। शिव पूर्ण काम हैं, तृप्त काम हैं। काम का अर्थ केवल वासना ही नहीं अपितु कामना भी है।

देव बड़ला स्मारक इंचार्ज कुंवर विजेंद्र सिंह भाटी ने कहा देवाधिदेव महादेव भूत भावन भगवान शंकर की आराधना का पर्व साधना आस्था श्रद्धा विश्वास का पवित्र श्रावण मास भगवान शिव को अतिप्रिय है भगवान महादेव ने सभी प्रकार की कामनाओं, इच्छाओं और वासनाओं को नष्ट किया है। शिवजी के जीवन में कोई लोभ नहीं केवल राम दर्शन, राम कथा श्रवण और राम नाम गायन ही उनकी कामना है। भगवान शिव बहिर्मुखी नहीं, अंतर्मुखी रहते हैं।

अंतर्मुखी रहने वाला साधक ही शांत, प्रसन्नचित्त, परमार्थी, सम्मान की इच्छा से मुक्त, क्षमावान और लोक मंगल के शिव संकल्पों को पूर्ण करने की सामर्थ्य रखता है..शिवपुराण में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में अराधना का उत्तमोत्तम फल है जिसमें कोई संशय नहीं है।शास्त्रों में वर्णित है कि सावन महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए ये समय भक्तों, साधु-संतों सभी के लिए अमूल्य होता है। यह चार महीनों में होने वाला एक वैदिक यज्ञ है,

जो एक प्रकार का पौराणिक व्रत है, जिसे ‘चौमासा’ भी कहा जाता है; तत्पश्चात सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव ग्रहण करते हैं। इसलिए सावन के प्रधान देवता भगवान शिव बन जाते हैं। श्रावण मास के चतुर्थ सोमवार के शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में बाबा विलवैश्वर महादेव का जल अभिषेक किया सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा हूं अनेक ग्रामों से कावड़ यात्री बाबा को जिला कंकर क्षेत्र की सुख शांति एवं

समृद्धि के लिए मंगल कामनाएं की एक महा से देव बड़ला की पहाड़ियां हर हर महादेव के नारों से गूंज रही है इस बार सबसे अधिक भीड़ रही भक्तों की विंध्याचल पर्वत की नाभि स्थल पर बसा देव बड़ला क्षेत्र की सबसे बड़ी व प्राचीन धारोह है लेकिन 24 घंटे वाली बिजली सुलभ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित है यहां आने वाले भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ता है खास करके महिलाओं को ज्यादा समस्या आती है।

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