आज बेटियों को महारानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती,पद्माबति जैसी वीरांगनाओं के जीवन,उनके शौर्य,उनके त्याग,बलिदान से अवगत कराये-डॉ निवेदिता चतुर्वेदीसमय के साथ चलना ही आधुनिकता है-नही चलेंगे तो रूढ़िवादी कहलायेंगे-सुरेश गुप्ताआधुनिकता सनातन की छाया में विषय पर आयोजित मातृशक्ति मिलन कार्यक्रम में महिलाओं को मिला संस्कार,संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का संदेश

आष्टा । राष्ट्रीय अस्मिता जागरण न्यास मप्र शाखा सीहोर द्वारा गीतांजलि गार्डन आष्टा में एक अनूठा कार्यक्रम “मातृशक्ति मिलन” का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम का विषय “आधुनिकता सनातन की छाया में” था । इस विषय पर कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्तिथ डॉ. श्रीमती निवेदिता चतुर्वेदी, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग, भोपाल ने उपस्तिथ मातृशक्तियो को संबोधित करते हुए अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन, जीवन मूल्यों के संरक्षण में मातृशक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

उन्होंने महिलाओं से परिवार और समाज में संस्कारों के संवर्धन तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा की आज एक ऐसी नकारात्मक मानसिकता बना ली है कि महिलाए तो कुछ कर ही नही सकती है,वो तो मंदबुद्धि होती है,भारत मे तो महिलाओं की जगह बस घर,गृहस्ती, रसोई तक सीमित है । आज महिलाओं पर जो अत्याचार,अनाचार,व्यभिचार हो रहा है उसका जिम्मेदार कौन है । उसका जिम्मेदार हम महिलाए ही है,क्यो,क्योकि हम कैकयी नही बन पाई है । महिलाओं को जो चूड़ी पहनती है,जो घरों में रहती है उनेह रूढ़िवादी कहा जाता है । माथे पर लगा सिंदूर को एक बंधन माना जाता है ।

आज महिलाओं को रानीदुर्गावती,लक्ष्मीबाई,पद्माबति बनने की आवश्यकता है,इन वीरांगनाओं ने किस तरह अत्याचार,अनाचार,दूषित मानसिकता से लड़ाई लड़ी ओर अमर हो गई । आज बंधनो से मुक्त होने की जरूरत है । आप देखे आज इसरो में कितनी महिलाए वैज्ञानिक है । अपने ओजस्वी उद्बोधन में निवेदिता चतुर्वेदी ने आईटी कंपनी इंफोसिस की सुधामूर्ति का उदाहरण दे कर महिलाओं को सोये से जागने का आव्हान किया । भारत मे संविधान में महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर अधिकार दिये है । महाभारत में द्रोपदी के साथ जो कुछ हुआ वो यह संदेश देता है की विधर्मियो,व्यभिचारियों,दुष्कर्मियों व

नारियों का अपमान करने वाला कोई भी हो चाहे वो बन्धु,वांधव,ज्येष्ठ,पिता,गुरु या अन्य कोई भी हो वो माफी के योग्य नही होता है । आज विधर्मी हमारी बाहनो को,बेटियों को उठा कर अगवा कर ले जाते है हम क्या करते है,शहर बन्द,हड़ताल,चक्काजाम, ज्ञापन देते है ।इनकी जरूरत नही है,जरूरत है,जो हाथ हमारी बहन,बेटी की ओर बढ़े उसके हाथों को तोड़कर फेंक दो । इसलिये ऐसे मिलन समारोह के माध्यम से महिलाओं में उनके अंदर छुपी शक्तियों को जगाने का कार्य किये जा रहे है । हमे आधुनिकता के साथ साथ सनातन को भी साथ ले कर चलना होगा ।

ताकि हमारी पहचान बनी रहे,हमारा अस्तित्व बना और बचा रहे ।आज आवश्यकता है अपनी बेटियों को महारानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती,पद्मबति जैसी वीरांगनाओं के जीवन से,उनके शौर्य से,उनके त्याग,बलिदान से अवगत कराये,उनेह बताये । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अस्मिता जागरण न्यास के प्रमुख श्री सुरेश गुप्ता ने आयोजित मातृशक्ति मिलन कार्यक्रम के उद्देश्यों से अवगत कराते हुए कहा की इस न्यास का प्रमुख उद्देश्य यही है की हम आधुनिकता के साथ अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को,सनातन संस्कृति को,सांस्कृतिक स्वाभिमान को भी जीवित सुरक्षित रखे ।

आज की नई पीढ़ी को हमारे महापुरुषों,गौरवशाली स्थानों के महत्व उनके त्याग,बलिदान,शौर्य से रूबरू कराने के लिये ऐसे कार्यक्रमो का आयोजन किये जायें । आज जो मातृशक्ति मिलन कार्यक्रम न्यास ने आयोजित किया है उसका विषय भी हमने आधुनिकता सनातन की छाया में रखा है । श्री गुप्ता ने कहा की समय के साथ चलना ही आधुनिकता है । अगर हम समय के साथ नही चलेंगे तो यह रूढ़िवादिता कहलायेगा । लोग कहते है हमने तो गुण चना खा कर,सायकल से घूम घूम कर कार्य किया है,आज ये कार में घूम रहे है । आज कार में घूमना आधुनिकता है,लेकिन हमने आज भी सायकल को नही छोड़ा है । अर्थात आधुनिकता तो चाहिये लेकिन हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को नही छोड़ सकते है ।

इसलिये समय के साथ अपने आप को प्रासंगिक बनाना यही तो आधुनिकता है लेकिन पाश्चात्य की नकल करना यह गलत है । इस कार्यक्रम के बैनर पर लिखा है “मातृशक्ति संभवः” अर्थात हमारी मातृशक्ति सब कुछ कर सकती है ।कार्यक्रम के प्रारम्भ में अक्षिता सोनी ने गणेश वंदना की मनमोहक प्रस्तुति प्रस्तुत की । आयोजको की ओर से डॉ निवेदिता चतुर्वेदी का स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया गया ।आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता

डॉ. श्रीमती चंद्रा नगीनचंद्र जैन (पीएच.डी.), ने की एवं सुरेश गुप्ता मंचासीन रहे । आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित सभी मातृशक्तियों ने विषय पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया तथा राष्ट्र, समाज और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। अंत में सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार डॉ चंद्रा जैन ने एवं संचालन सुरेश गुप्ता ने किया ।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नगर की मातृशक्ति उपस्तिथ रही ।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Scroll to Top