

आष्टा:- न्यायालय परिसर, आष्टा में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के आदेशानुसार दिनांक 09 मई 2026 को नेशनल लोक अदालत में सर्वप्रथम माॅ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष तहसील विधिक सेवा समिति, आष्टा की अध्यक्ष/जिला न्यायाधीश, श्री विजय डांगी एवं न्यायाधीश श्री महेश कुमार चैहान, न्यायाधीश श्रीमती प्रीति अग्रवाल, न्यायाधीश मीनाक्षी रावत, न्यायाधीश श्री अमन सुलिया, न्यायाधीश श्रीमती ऋचा शर्मा, भारतीय स्टेट बैंक मेन ब्रांच अभिनव सिंह एवं सूरज राउत के जावर प्रबंधक श्री हितेन्द्र सिंह रघुवंशी श्री कन्नौद मिर्जी श्री रजत जैन कन्नौद रोड प्रबंधक वीरेन्द्र परसाई,

कोठरी प्रबंधक श्री उमाशंकर मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड के उपमहाप्रबंधक रमेश सिंह, भानू तिवारी अधीक्षक यंत्री, विजय पाटीदार बैंक आॅफ इंडिया शाखा प्रबंधक, एम.के. कारपेंटर म.प्र. ग्रामीण बैंक शाखा प्रबंधक, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष कृपाल सिंह ठाकुर ,अधिवक्तागण एवं कर्मचारीगण ने माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर नेशनल लोक अदालत का प्रारंभ किया गया। तपती गर्मी में बेजुवानों का सहाराः एक सकोरा जिला न्यायाधीश विजय डांगी एवं अन्य न्यायाधीशों ने न्यायालय परिसर में वृक्षों पर सकोरा बांधकर उपस्थित पक्षकारगण को संदेश दिया

है कि वे गर्मी के इस मौसम में पक्षियों को बचाने हेतु घर की छत पर या पास स्थित वृक्षों पर सकोरे अवश्य बांधे इन गर्म हवाओं के थपेड़ों के बीच दाना-पानी के लिए बिल-बिलाते हुए पक्षियों की तरफ लोगों का ध्यान कम ही जाता है। इस बिगड़ते पर्यावरण के चलते सबसे ज्यादा परेशान पक्षी ही होते है न्यायाधीशगण ने पक्षकारों को इस अवसर पर पक्षियों के लिए जलपात्र बांटे जिससे बेजुवान पक्षी अपनी प्यास बुझा सके। पर्यावरण प्रेमी संघ के प्रेरक धीरज धारवां ने नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अपने-अपने निवास स्थान पर गर्मी के मौसम से जलपात्र बांधकर प्यासे पक्षियों की जलसेवा कर पुण्य कमायें।

लोक अदालत का चर्चित मामला यह रहा कि आष्टा निवासी सुमेरा बी अपनी पुत्री के साथ 6-7 महीने से घर पर पति अमन शाह से मनमुटाव के कारण घर बैठी थी उसे न्यायाधीश श्रीमती प्रीति अग्रवाल एवं जावेद अख्तर अधिवक्ता की समझाइश से पति अमन शाह के साथ प्रकरण में समझाईश देकर राजीनामा करवाया गया एवं दोनों को हंसी-खुशी के साथ रहने हेतु ससुराल रवाना किया गया। लंबित प्रकरणों में न्यायाधीश श्री विजय डांगी के न्यायालय में 103 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें से 08 प्रकरण निराकृत हुए 16,85,000/- रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। न्यायाधीश श्री महेश कुमार चौहान के द्वारा कुल विद्युत प्री लिटिगेशन के 800 प्रकरण निराकरण के लिए रखे गए थे।

जिसमें से राजीनामा अनुसार कुल 339 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिसमें 36,87,861/- रुपये का लाभ हुआ। न्यायालय के कुल 200 प्रकरण रखे गए थे जिनमें से 35 प्रकरणों निराकरण हुआ जिसमें 11,33,916/- रुपये का लाभ हुआ। न्यायाधीश श्रीमती प्रीति अग्रवाल के न्यायालय में प्री लिटिगेशन के संपत्तिकर/जलकर के कुल 192 प्रकरणों का निराकरण हुआ जिसमें 5,36,4008/- रुपये जमा कराये गये एवं न्यायालय के कुल 236 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें से 12 प्रकरण निराकृत हुए तथा 11,00,000/- रूपये का लाभ प्राप्त हुआ।

इसी प्रकार न्यायाधीश श्रीमती मीनाक्षी रावत के न्यायालय में बैंक प्री लिटिगेशन के 03 प्रकरण जिसमें से 03 का निराकरण हुआ और 4600/- रुपये राशि राजीनामा अनुसार जमा कराई गई एवं न्यायालय के कुल 11 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें ने 11 प्रकरणों का निराकरण हुआ जिसमें 7,17,200/- रुपये लाभान्वित हुए। न्यायाधीश श्री अमन सुलिया के न्यायालय में 30 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें से 9 प्रकरण निराकृत हुए तथा 36,15,998/- रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। न्यायाधीश श्रीमती ऋचा शर्मा के न्यायालय में 26 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें से 25 प्रकरण निराकृत हुए तथा 8,09,338/- रुपये का लाभ प्राप्त हुआ।