संस्कृति हायर सेकेंडरी स्कूल में गूंजा “ॐ नमः शिवाय”, विद्यार्थियों ने बनाई अद्भुत मानव श्रृंखला

आष्टा- भोजन, साक्षरता और अध्यात्म का अनूठा संगम — श्रावण मास के पावन और पवित्र अवसर पर संस्कृति हायर सेकेंडरी स्कूल का पूरा परिसर पूरी तरह से भक्तिमय नजर आया। विद्यालय के डायरेक्टर व प्राचार्य सर्वेश उपाध्याय के कुशल मार्गदर्शन में एक विशेष एवं भव्य आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने मानव श्रृंखला के माध्यम से “ॐ नमः शिवाय” की एक आकर्षक और सजीव (चलित) आकृति का निर्माण किया।

इस धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में सीनियर विद्यार्थियों के साथ-साथ नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भी पूरे उत्साह और जोश के साथ हिस्सा लिया। बच्चों द्वारा बनाई गई इस कलात्मक आकृति ने वहां मौजूद हर व्यक्ति का मन मोह लिया। विद्यार्थियों की इस उत्कृष्ट प्रतिभा और अनुशासन को देखकर शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यालय प्राचार्य ने उनकी भरपूर प्रशंसा की।

कार्यक्रम की झलकियाँ और सहयोग- इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में उप प्राचार्य महेंद्र सिंह परिहार, वरिष्ठ शिक्षिका अनीता ताम्रकार मैम, राजलक्ष्मी वर्मा मैम एवं समस्त एक्टिविटी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी अहम भूमिका निभाई।

“ॐ नमः शिवाय” महामंत्र का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व- विद्यालय के डायरेक्टर व प्राचार्य सर्वेश उपाध्याय ने बच्चों को इस महामंत्र के महत्व से अवगत कराते हुए बताया कि “ॐ नमः शिवाय” केवल पांच अक्षरों का एक समूह नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली और ऊर्जावान मंत्र है। पंचतत्वों का संतुलन: ‘न’, ‘म’, ‘शि’, ‘वा’, ‘य’ ये पांच अक्षर सृष्टि के पांच मूलभूत तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मंत्र के जाप या स्मरण से शरीर और मन के भीतर ये पंचतत्व संतुलित होते हैं।

आंतरिक शांति और ऊर्जा: श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना और इस मंत्र के जप से मानसिक तनाव दूर होता है, एकाग्रता बढ़ती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अहंकार का त्याग: ‘नमः शिवाय’ का अर्थ है — “शिव को नमन” या “मैं अपने अहंकार को त्यागकर उस परम चेतना को समर्पित होता हूँ।” यह विद्यार्थियों में विनम्रता, अनुशासन और उच्च संस्कारों का बीजारोपण करता है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत इस अद्भुत कला ने यह साबित कर दिया कि संस्कृति स्कूल के विद्यार्थी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को सहेजने में भी सबसे आगे हैं।

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