
मध्यप्रदेश- बीते दिनों अखिल भारतीय जाट महासभा की राष्ट्रीय सचिव वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह पचोर ने एक प्रेस विज्ञप्ति जार कर बताया कि पूर्व की यूपीए सरकार ने 4 मार्च 2014 को जाट समुदाय को ओबीसी की सूची में शामिल करने उन्हें 27% आरक्षण का लाभ देने अधिकारिक नोटीफिकेशन जारी किया था । जिसमें देश के 9 राज्यों शामिल किये थे जिनमें राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड राज्य रहे ।
लेकिन! 2014 लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में भाजपा सरकार बनते ही केंद्र सरकार ने 2015 में सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से यूपीए सरकार के इस फैसले को रद्द करा दिया जिसके अंतर्गत जाटों को 9 राज्यों में आरक्षण का लाभ दिया जा रहा था।
केंद्र सरकार की ये नीति कहीं न कहीं जाट समुदाय के साथ बेईमानी है।
केंद सरकार ने वर्तमान में जाटों को अनारक्षित श्रेणी में रखा है।
जबकि 2014 में सामाजिक न्याय विभाग एवं अधिकारिता मंत्रालय ने मंजूरी दिवाकर ओबीसी की सूची में शामिल किया था।
अखिल भारतीय जाट महासभा के महासचिव माननीय युद्धवीर सिंह जी लगातार जाट आरक्षण की मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं ।
केंद्र सरकार इससे बचती है वो कभी बैठकर इस मसले पर बात नहीं करना चाहती।
जाटों के साथ ऐसा भेद भाव क्यों…???
*राजेंद्र सिंह (राष्ट्रीय सचिव)* केंद्र में जाट आरक्षण खत्म करके इस सरकार ने ये सिद्ध कर दिया कि ये सरकार जाट विरोधी सरकार है जाट बाहुल्य राज्यों में भी राजनीतिक स्तर पर जाटों को उच्च पदों से दूर रखा जाता है – चुनाव के समय समीकरण साधने जाट चेहरों को आगे करते हैं काम निकलने पर उन्हें तवज्जो न देना इस सरकार की फितरत है ।
हम पुरजोर तरीके से बार-बार ये मांग करते हैं कि क्रेंद्र में जाट आरक्षण हमारा अधिकार है और हम लेकर रहेंगे।
*विलास पटेल (प्रदेशाध्यक्ष)* केवल जाटों का आरक्षण रद्द करना ये स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार जाटों से भेद भाव रखती है ।जाट समाज में भी अधिकांश परिवार ऐसे हैं जिन्हें बच्चों की शिक्षा उनकी नौकरी के लिए आरक्षण की जरूरत है। जाट समुदाय की अनदेखी समाज के साथ अन्याय है ।
हम हर स्तर से समाज के लिये प्राण प्रण से केंद्र सरकार से ये मांग करते हैं कि केंद्र में जाट आरक्षण लागू कर जाट समय के साथ न्याय करें।
*कवि- राणा भूपेंद्र सिंह (प्रवक्ता)* सरकार का काम होता है जनहित में अपनी नीतियों का प्रयोग करना न कि किसी को दिया हुमा छीनने का कुत्सित प्रयास करना।
जब अन्य समाजों को आरक्षण मिल रहा है तो जाटों से परहेज़ क्यों..?
केंद्र सरकार तानाशाही सरकार है आजकल न्यायालय भी इनके इशारे पर काम करते हैं।
हम सब अपने हक के लिये एक होकर लड़े ,मिलकर सड़कों पर उतरें केंद्र सरकार से 27% आरक्षण पुनः लागू करने की मांग करें ।
*अखिल भारतीय जाट महासभा*
