

कन्यादान फाउंडेशन की अनूठी पहल: सैनिटरी पैड की बिक्री से जुटाए फंड से कराया कन्यादान, महिलाओं को दे रहे आत्मनिर्भरता
राजगढ़, मध्य प्रदेश: समाज में सामाजिक सरोकार और महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए ‘कन्यादान फाउंडेशन’ एक नई लकीर खींच रहा है। यह संस्था न केवल जरूरतमंदों का सहारा बन रही है, बल्कि महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रही है।

सैनिटरी पैड से कन्यादान तक का सफर- संस्था का कार्य करने का तरीका बेहद अनूठा है। कन्यादान फाउंडेशन सैनिटरी पैड के निर्माण और बिक्री से होने वाले मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा ‘कन्यादान कोष’ में जमा करता है। इस कोष का उपयोग समाज की उन बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग देने के लिए किया जाता है, जिनके परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं।

महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान- फाउंडेशन केवल दान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी सक्रिय है। संस्था द्वारा ग्रामीण और शहरी महिलाओं को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे अपने परिवार की आय में योगदान दे सकें और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें। ग्राम अरनिया जौहरी तहसील आष्टा जिला सीहोर में दिखी मानवता की झलक इसी मानवीय दृष्टिकोण के चलते हाल ही में कन्यादान फाउंडेशन ने जिला सीहोर के आष्टा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम अरनिया में एक बड़ा सहयोग किया। संस्था ने तकतसिंह जी की सुपुत्री के विवाह के अवसर पर उनके परिवार को 51,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि भेंट की।

इस अवसर पर कन्यादान फाउंडेशन के संस्थापक श्री ऋषि सरदाना,सुश्री काजल सक्सेना, बिजनेस हेड श्रीमती दीपा श्रीवास्तव , देवयानी सक्सेना, मेघा विश्वकर्मा, सुषमा परमार,रूपाली सक्सेना, सीमा परमार, दीपिका जाधव, सविता बालोदिया, राधा कुंवर,ज्योति वर्मा व संस्था के सदस्य गण अन्य सदस्य उपस्थित रहे। इस सहयोग ने न केवल विवाह समारोह को गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न कराने में मदद की, बल्कि संस्था के नेक उद्देश्यों को भी समाज के सामने स्पष्ट किया। स्थानीय निवासियों ने फाउंडेशन की इस पहल की जमकर सराहना की है और इसे अन्य संस्थाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया है।