

आष्टा- माँ वैष्णवी नगर, आष्टा स्थित कार्यालय पर बुधवार को एक अत्यंत हर्षोल्लासपूर्ण और आत्मीय क्षण देखने को मिला। भोपाल संभाग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रमोद कुमार सोनकर और भोपाल संभाग की जेल अधीक्षक (जेलर) श्रीमती अलका सोनकर जी के आष्टा आगमन पर समाजसेवी वीरेंद्र राठौर के नेतृत्व में मां वैष्णवी परिवार की ओर से उनका भव्य स्वागत एवं सौजन्य भेंट की गई।

स्नेह, मार्गदर्शन और आत्मीयता का संगम- मुलाकात के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों का स्नेह, आत्मीय अपनापन और प्रेरणादायक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि ऐसे सम्मानित प्रशासनिक अधिकारियों का सान्निध्य हमेशा नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है। कार्यक्रम के दौरान भोपाल संभाग में उनके नए दायित्व ग्रहण करने पर हृदय से हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं दी गईं।

माँ वैष्णवी परिवार ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वे अपने नवीन दायित्वों का पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करते हुए जनसेवा में निरंतर नए आयाम स्थापित करें। माँ वैष्णो देवी जी से दोनों अधिकारियों के उज्ज्वल, सफल और मंगलमय भविष्य की कामना की गई। सहज, सरल और सेवाभावी व्यक्तित्व के धनी:- समाजसेवी वीरेंद्र राठौर इस पूरे आत्मीय आयोजन के केंद्र में रहे समाजसेवी वीरेंद्र राठौर, जो अपने मिलनसार और परोपकारी स्वभाव के लिए आष्टा क्षेत्र में विशेष पहचान रखते हैं। उनके सामाजिक योगदान को दर्शाती कुछ पंक्तियाँ:

“सरलता जिनकी पहचान है, सेवा ही जिनका मान है,”
“हर जरूरतमंद के चेहरे पर जो बिखेरे मुस्कान हैं।”
“धर्म और समाज के हर पथ पर जो आगे बढ़कर आएं,”
“ऐसे कर्मयोगी वीरेंद्र राठौर को दिल से सब अपना कहें!”

वीरेंद्र राठौर जी का व्यक्तित्व बेहद सहज और सरल है। वे हर सामाजिक कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन, जुलूस और उत्सव में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराते हैं। समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के प्रोत्साहन से लेकर पधारे अतिथियों के सत्कार तक, हर मोर्चे पर वे अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाते हैं। समाजसेवा के प्रति उनका समर्पण और क्षेत्र के हर आयोजन में उनकी सहभागिता सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार ने सुनाया रुक्मणी विवाह प्रसंग, परोपकार को बताया सबसे बड़ा धर्म

आष्टा। श्रद्धावान व्यक्ति को ही ज्ञान प्राप्त होता है। श्रद्धावन लभते ज्ञानम, और सनंसय आत्मा विनश्यति। माता-पिता, गुरु, भगवान और शास्त्र में श्रद्धा रखें । जीवन में हमेशा परोपकार करते रहें। उक्त प्रेरक प्रवचन सेंधव समाज धर्मशाला रुपेटा मैं चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन मालवा क्षेत्र के गौरव संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार द्वारा श्रवण कराए गए। कथा से पूर्व मुख्य यजमान विक्रम सिंह ठाकुर एडवोकेट और संपूर्ण ग्राम वासियों द्वारा संत श्री का शाल श्रीफल और पुष्पमाला से स्वागत किया।

महाराज श्री द्वारा आगे बताया कि तुलसी बाबा कहते हैं।परहित सरिस धर्म नहीं भाई। पर पीड़ा सम नहीं अधमाई। परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है। परमार्थ के कारण मांसाहारी पक्षी गिद्धराज जटायू को भगवान की गोदी प्राप्त हुई। प्राण चले गए पर अपना धर्म नहीं छोड़ा। वही परम भागवत पितामह भीष्म को संकट काल में द्रोपती की सहायता नहीं करने के कारण बाणो की सैय्या पर लेटना पड़ा। दूसरों की पीड़ा को समझो। संत कहते हैं।वैष्णव जन तो उनको कहिए, जो पीर पराई जाने रे। क्योंकि गरीब की हाय लग गई तो आपका सर्वस्व नष्ट हो जाएगा।

रहीम जी लिखते हैं। गरीब को मत सताइए, वाह की मोटी हाय। मरे पशु के चृम से, लोह भस्म हो जाय। प्रत्येक जीव में भगवान के दर्शन करना है। सियाराम में सब जग जानी। करूंहु प्रणाम जोर जुग पानी ।आगे पूज्य महाराज श्री द्वारा भगवान श्री कृष्ण रुक्मणी जी के विवाह की मंगल कथा को बड़े विस्तार से सुनाया। रुक्मणी जी के विदाई प्रसंग सुनकर सारे श्रोताओं के आंखों से आंसू झरने लगे । भगवान की कथा से हमारे जीवन की व्यथा मिटती है।

भगवान की कथा जीव को मृत्यु के भय से मुक्त करती है। कथा के मध्य महाराज श्री द्वारा गाए हुए मधुर भजनों पर सब ने झूम झूम कर नृत्य किया। आज कथा के समापन अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस अवसर पर महामंडलेश्वर राजेश्वरानंद, मनोहर बैरागी, मेहरबान सिंह राजेंद्र सिंह सरपंच,बलवान सिंह ठाकुर, जितेंद्र सिंह चक्की, सुरेंद्र सिंह ठाकुर केसर सिंह, फतेह सिंह दौनिया, ठाकुर, गोपाल सिंह सचिन ठाकुर, मनोहर सिंह भील खेड़ी,रूप सिंह कन्या खेड़ी, दीपू ठाकुर , धीरज सिंह, कृपाल सिंह,सहित बड़ी संख्या में भक्तगण पधारे।
