

updatenews247.com धंनजय जाट आष्टा 7746898041– नगर में संत श्री गोविंद जाने जी महाराज के मुखारविंद से चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा के दौरान संत श्री ने कर्म, संस्कार और मानवीय मूल्यों पर सारगर्भित प्रवचन दिया।
संत श्री ने कहा कि व्यक्ति अपने कर्मों से ही पहचाना जाता है और इतिहास में उसी के अनुसार उसका नाम अंकित होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इतिहास में किसी ने अपने बच्चों का नाम दुर्योधन, कंस या रावण नहीं रखा, क्योंकि इन नामों को उनके कुकर्मों ने बदनाम कर दिया। कोई भी माता-पिता नहीं चाहता कि उनके बच्चों में ऐसे संस्कार आएं।

संत श्री ने कहा कि यदि भगवान की दृष्टि में श्रेष्ठ बनना है और उसकी “डायरी” में अपनी छवि को उज्ज्वल करना है तो प्रतिदिन दीपक जलाएं, गाय को रोटी खिलाएं, मंदिर की सेवा करें, संतों का सम्मान करें तथा गरीब, दीन-दुखियों के दर्द को पहचान कर करुणा का हाथ बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा और अच्छे संस्कार दिए जाएं तो वही बच्चे राम, भरत और श्रवण कुमार जैसे महापुरुष बनते हैं। भगवान ने मनुष्य को पृथ्वी पर एक विशेष भूमिका दी है और यह इस पर निर्भर करता है कि वह अपने जीवन रूपी अभिनय को किस प्रकार निभाता है। संत श्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पुत्र चरित्रहीन, बेईमान और अनीति करने वाला है तो वह जीवनभर माता-पिता के लिए जूते में पड़े पत्थर के समान कष्टदायक सिद्ध होता है।

वहीं यदि पुत्र उत्तम चरित्र, सेवा भाव और धर्म के मार्ग पर चलने वाला है, तो वह सामान्य वेश में भी महात्मा के समान पूजनीय माना जाता है। उन्होंने आदर्श परिवार की परिभाषा बताते हुए कहा कि जिस घर में परस्पर सम्मान हो, बुजुर्गों के चरण स्पर्श किए जाते हों, गीता का पाठ होता हो, बच्चों को राम के आदर्शों की शिक्षा दी जाती हो, निंदा से दूरी रखी जाती हो तथा धर्मगुरु और गौ माता की सेवा होती हो—वही घर वास्तव में आदर्श माना जाता है। कथा के अंत में संत श्री ने कहा कि जब भी मंदिर जाएं, पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान के दर्शन करें, क्योंकि साक्षात भगवान भक्तों को दर्शन देते हैं। जीवन में यदि श्रेष्ठ बनना है तो तीन बातों को अपनाएं

—बुरा न देखें, बुरा न सुनें और बुरा न कहें, यही विचार मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं। विशिष्ट जनों की उपस्थिति कथा श्रवण के अवसर पर क्षेत्रीय सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी, विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर, पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह मेवाड़ा, अनार सिंह देवनखेड़ी सरकार, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मीना विनीत सिंगी, जीवन सिंह मंडलोई, समिति अध्यक्ष रूपेश राठौर, संयोजक मनोज नागर सहित बंटी मेवाड़ा, जगदीश चौहान, मेघा परमार, देवराज परमार, शैलेंद्र राजपूत, चेतन सिंह ठाकुर, राजा मेवाड़ा, जुगल पटेल, तेज सिंह राठौड़, चेतन वर्मा, नानूराम मेवाड़ा, सोभाल सिंह ठाकुर, जितेंद्र सितोलिया, धीरज पटेल, जटाल सिंह, रघुवीर चौहान, मयूर नागर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

