

आष्टा। शनि जयंती के पावन अवसर पर आष्टा में विभिन्न शनि मंदिरों, खेड़ापति मंदिर के सामने , बड़ाबाजार ,किलेरामा रोड पापनाश नदी किनारे स्थित सभी शनि मंदिरों में शनिवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भक्तों द्वारा तेल अर्पण, पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा एवं शनि स्तोत्र पाठ का क्रम चलता रहा। मंदिर परिसर “जय शनिदेव” के जयघोष से गूंजता रहा।इस अवसर पर पूर्व नपाध्यक्ष एवं प्रभु प्रेमी संघ के संयोजक कैलाश परमार ने अपने मित्रों के साथ विभिन्न शनि मंदिरों में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा क्षेत्र की सुख-

समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। मंदिरों के पुजारियों द्वारा उन्हें अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया गया।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को अनुशासन, परिश्रम, धैर्य, न्याय और कर्मफल का प्रतीक बताया गया है। माना जाता है कि शनि की अनुकूल दृष्टि व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, सफलता और प्रतिष्ठा प्रदान करती है, वहीं प्रतिकूल प्रभाव व्यक्ति को संघर्षों के माध्यम से जीवन का महत्वपूर्ण पाठ सिखाता है।

शनि जयंती पर विशेष रूप से तिल के तेल का अभिषेक, काले तिल, उड़द एवं दान-पुण्य का महत्व माना गया है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा और सेवा भाव से की गई पूजा जीवन के कष्टों को कम कर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।खेड़ापति शनि मंदिर में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही तथा यहां विशालभंडारे का आयोजन भी किया गया।अन्य सभी मंदिरों में प्रसाद वितरण हुआ, पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण देखने को मिला।

पूर्व नपाध्यक्ष परमार के साथ पूर्व पार्षद सुभाष नामदेव, जिला पंचायत के सदस्य कमल सिंह चौहान, केमिस्ट श्रेयांश जैन, बंशीलाल बांबे , जितेंद्र चौहान आदि साथ रहे। पूर्व नपाध्यक्ष परमार ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में व्यक्ति की मेहनत के अनुरूप परिणाम नहीं मिल रहे है विभिन्न कारणों से कुछेक लोगों को छोड़ दिया जाए तो परेशानियों से आम जन ग्रस्त है ऐसे में शनि देव की शरण में आकर अपार आध्यात्मिकता से भरी हुई ऊर्जा मिलती है।
