

आष्टा। नमक की तरह जीवन जीना सीखिए। नमक खारा होने के बावजूद हर व्यक्ति के लिए आवश्यक होता है और उसमें कभी कीड़े नहीं पड़ते। उसी प्रकार व्यक्ति को अपना व्यवहार ऐसा बनाना चाहिए कि वह सभी के लिए उपयोगी हो, लेकिन कोई उसका अनुचित लाभ भी न उठा सके। साथ ही जीवन में इतनी अधिक मिठास भी नहीं होनी चाहिए कि रिश्तों में स्वार्थ और विकार पैदा हो जाएं। आग लगाने वाली माचिस की कीमत कभी नहीं बढ़ती, लेकिन बाग लगाने वालों का सम्मान हमेशा बढ़ता है। इसलिए जीवन में आग नहीं, बल्कि बाग लगाने का कार्य करें।

ये विचार महाअभिग्रहधारी, तपकेसरी, उग्र विहारी एवं गोल्डन बुक अवार्ड से सम्मानित पूज्य डॉ. राजेश मुनिजी म.सा. ने रविवार को नगर प्रवेश के बाद महावीर भवन स्थानक में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।सिद्धिकगंज से 25 किलोमीटर पदयात्रा कर पहुंचे आष्टारविवार दोपहर डॉ. राजेश मुनिजी म.सा. एवं पूज्य राजेंद्र मुनिजी म.सा. का नगर प्रवेश लांगापुरा -अरोलिया मार्ग से हुआ। मुनि संघ की अगवानी पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार, सकल समाज अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद नरेंद्र कुशवाहा, सुभाष नामदेव,नरेन्द्र गंगवाल, स्थानकवासी श्रावक संघ अध्यक्ष लोकेंद्र बनवट,

पीयूष देशलहरा, विपिन बनवट, रिलेष बोथरा, विपिन सिंगी, वीरेंद्र देशलहरा, अंकुर वोहरा, पराग धाड़ीवाल सहित समाजजनों ने की।सिद्धिकगंज से लगभग 25 किलोमीटर का मंगल विहार करते हुए मुनि संघ आष्टा पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर मंगल पाठ सुना और आशीर्वाद प्राप्त किया।नमक की तीन विशेषताओं से समझाया जीवन का दर्शनप्रवचन में डॉ. राजेश मुनिजी ने कहा कि नमक की तीन विशेषताएं व्यक्ति को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश देती हैं। नमक खारा होता है, फिर भी उसके बिना भोजन अधूरा है। इसी प्रकार व्यक्ति का आचरण ऐसा होना चाहिए

कि समाज उसे सम्मान दे और उसकी आवश्यकता महसूस करे। दूसरी बात, नमक में कभी कीड़े नहीं पड़ते, इसलिए जीवन में संतुलन और स्वाभिमान बनाए रखना चाहिए। तीसरी बात, शर्ट का पहला बटन सही लग जाए तो बाकी सभी बटन अपने आप सही लग जाते हैं। इसी प्रकार जीवन का पहला कदम सही दिशा में हो तो आगे के कार्य भी सफल होते चले जाते हैं।उन्होंने कहा कि माचिस आग लगाने का काम करती है, इसलिए उसकी कीमत कभी नहीं बढ़ती, जबकि बाग लगाने वालों का सम्मान और महत्व हमेशा बढ़ता है।

व्यक्ति को समाज और परिवार में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।भजनों से किया भाव-विभोरधर्मसभा के दौरान डॉ. राजेश मुनिजी ने भजनों के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को प्रेरित किया। उन्होंने “जाने-आने में हुई हिंसा, मिच्छामि दुक्कडम्…” भजन प्रस्तुत कर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को भाव-विभोर कर दिया।पूज्य राजेंद्र मुनिजी म.सा. ठाणा-2 के सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।सवा वर्ष बाद आगमन से श्रद्धालुओं में उत्साहकरीब सवा वर्ष बाद गुरुदेव के पुनः आष्टा आगमन से सकल जैन समाज सहित श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। देशभर में तप, त्याग, संयम और साधना के लिए विख्यात डॉ. राजेश मुनिजी निरंतर धर्म प्रभावना एवं जनजागरण के लिए पदयात्रा कर रहे हैं।

उनका सतत विहार श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।वर्ष 2026 का चातुर्मास पानीपत मेंपूज्य डॉ. राजेश मुनिजी म.सा. का वर्ष 2026 का चातुर्मास एवं वर्षावास पंजाब-हरियाणा क्षेत्र के ऐतिहासिक नगर पानीपत में निर्धारित है। धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की भूमि पानीपत गुरुदेव के आगमन की तैयारियों में जुट गई है। वहां उनके सान्निध्य में धर्म प्रभावना, तप, साधना, प्रवचन एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।श्रद्धालुओं का मानना है कि गुरुदेव के चरण पड़ने से पानीपत की पावन धरा पर संयम, साधना और धर्म प्रभावना का नया अध्याय प्रारंभ होगा। उनके वर्षावास को लेकर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के जैन समाज में उत्साह का वातावरण बना हुआ है।
