

आष्टा। मालव गिरनार आष्टा तीर्थ श्री नेमिनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर किला में परम पूज्य पन्यास प्रवर श्री यशोजित विजय जी महाराज आदि गुरु भगवंतों की पावन निश्रा में 51 दिवसीय श्री उपधान तप आराधना चल रही है। 25 अक्टूबर से 14 दिसंबर 2026 तक आयोजित इस तप आराधना के दौरान धर्म साधना के साथ स्वास्थ्य सेवा भी उपलब्ध कराई जा रही है। राजकोट, गुजरात से पधारीं एमडी आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ.विद्या शाह तप आराधना में शामिल साधु-संतों, श्रद्धालुओं और समाजजनों को निःशुल्क चिकित्सा परामर्श दे रही हैं।

वहीं उनके पास समय लेकर पहुंचने वाले मरीजों को भी अपनी चिकित्सा सेवा के अनुभव का लाभ अर्थात परामर्श निःशुल्क दे रही हैं।डॉ. विद्या शाह ने हमारे प्रतिनिधि से चर्चा करते हुए बताया कि 40 वर्षों से आयुर्वेदिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों की सेवा कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 1986 में अपनी चिकित्सा सेवा प्रारंभ की थी। पिछले करीब 35 वर्षों से साधु-संतों के सानिध्य में रहकर वे न केवल गुरु भगवंतों, बल्कि उनके भक्तों और समाजजनों को भी निःशुल्क परामर्श प्रदान कर रही हैं।

प्रेरणा को बनाया सेवा का संकल्पडॉ. शाह के अनुसार उनके बड़े ससुर उद्धव शाह ने उन्हें प्रेरित किया था कि स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा परामर्श के बदले कभी शुल्क नहीं लेना चाहिए। उन्होंने इस प्रेरणा को अपने जीवन का संकल्प बना लिया और आज तक किसी से परामर्श शुल्क नहीं लिया। उनका मानना है कि जरूरतमंदों को स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन देना भी मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है।विभिन्न तीर्थों पर भी देती हैं सेवाएंडॉ. विद्या शाह गुरु भगवंत वज्रसेन विजय जी महाराज की प्रेरणा से विभिन्न स्थानों पर स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से सेवाएं देती आ रही हैं।

मोहनखेड़ा तीर्थ सहित बड़े नगरों और छोटे शहरों में आयोजित शिविरों में वे मरीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराती हैं। कैंसर सहित विभिन्न रोगों से संबंधित शिविरों में भी उनकी सेवाएं ली जाती रही हैं।श्री उपधान तप आराधना के दौरान उनकी निःशुल्क चिकित्सा सेवा धर्म और मानव सेवा के समन्वय का उदाहरण बन रही है। तप आराधना में शामिल श्रद्धालुओं को धार्मिक साधना के साथ स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन भी मिल रहा है।


