

आष्टा। शांति नगर आष्टा में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर मर्यादा और संयम से जीवन जीने का प्रेरणादायी संदेश दिया गया। मालवा क्षेत्र के सुप्रसिद्ध कथावाचक संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि “जरूरत से ज्यादा बातचीत, जरूरत से ज्यादा लगाव, जरूरत से ज्यादा उम्मीद और जरूरत से ज्यादा भरोसा अंततः अधिक कष्ट का कारण बनता है।

इसलिए जीवन में हर कार्य मर्यादा में करना चाहिए, क्योंकि जहां अति होती है, वहां क्षति निश्चित होती है।”उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य को बाहरी शत्रुओं से उतना खतरा नहीं होता, जितना उसके भीतर मौजूद काम, क्रोध, मद और लोभ जैसे आंतरिक विकारों से होता है। इन पर नियंत्रण पाने वाला व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में बलवान कहलाता है।कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही भव्य और भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। मध्यरात्रि में जैसे ही भगवान श्री कृष्ण के जन्म का समय हुआ,

पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं द्वारा भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो गया।भगवान श्री कृष्ण जन्म की झांकी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें बाल स्वरूप भगवान को सुसज्जित पालने में विराजित किया गया। श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से पालना झुलाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। महिलाओं ने मंगल गीत एवं भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम स्थल को फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से भव्य रूप दिया गया। अंत में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।

इस अवसर पर सकल हिंदू समाज द्वारा कथावाचक संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार का पुष्पमाला एवं साफा पहनाकर भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम में सकल हिंदू समाज अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाहा (पूर्व पार्षद), संयोजक मुकेश नामदेव, सचिव मनीष डोंगरे, मोंटू कोरी, मीडिया प्रभारी राजीव गुप्ता, प्रेम नारायण जायसवाल, गोपाल पांचाल, मांगीलाल सिसोदिया सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।आयोजन में श्रीमती सुशीला अवलेशिया, ओमप्रकाश अवलेशिया एवं महेश अवलेशिया का विशेष सहयोग रहा। कथा श्रवण हेतु शंकर मंदिर प्रमुख हेमंत गिरी महाराज, जीवन सिंह गुणवान, शोभाल सिंह भाटी सहित बड़ी संख्या में मातृ-शक्ति की उपस्थिति रही।

