

आष्टा– उक्त आशय के उद्गार आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के प्रभावक शिष्य सिद्धक्षेत्र वेजयन्तिगिरी तीर्थ प्रणेता मुनि श्री मार्दव सागर जी महाराज के संघस्थ ब्रम्हचारी प्रशान्त भैया जी की जेनेश्वरी दीक्षा के पूर्व दिव्योदय जैन तीर्थ किला पर गोद भराई अनुमोदना समारोह के अवसर पर कहे भैया जी ने कहा कि बारहा भावनाओ का चिंतन ही हमारे लिए कल्याणकारी होगा सन्सार में सभी जीव सुख शांति के प्रयास के लिए रात दिन अपने सांसारिक कर्मो में लीन रहता है जीव का सन्सार में आना और जाना लगा ही रहता है

कषायों पर ओर मायाचारी पर अंकुश लगाए बिना यह संसार का चक्र निरन्तर ऐसे ही चलता रहेगा अब वैराग्य की ओर हमारा पुण्य का उदय आया है हमने अब मन बना लिया है अब विषयो में नही रमेंगे चिदानंद का पान करेंगे सदैव धर्म का पुरूषार्थ करते रहना चाहिए प्रत्येक जीव का अपनी अपनी योग्यता के अनुसार अपनी अपनी भूमिका के अनुसार जीवन मे पुण्य पाप का उदय चलता रहता है इस चक्र का समझना आवश्यक है कर्म सिद्धांत को जानना आवश्यक होगा

तभी हम मोक्ष मार्ग को समझ सकते है इसके लिए धर्म पुरुषार्थ करते रहना चहिये धर्म पुरुशार्थ से ही व्यक्ति अपने अंतिम लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है पूज्य मुनि श्री संस्कार सागर जी महाराज ने आशीर्वाद प्रदान करते हुए सभी जनो से दीक्षा की भावना भाने की बात कही हम सभी के जीवन मे यह दिवस जल्द आये और हम भी तीर्थंकर भगवान के कहे मार्ग पर चलकर अपना ।मोक्ष मार्ग प्रशश्त करे! दिगम्बर जैन पंचायत समिति के श्री शरद जैन के अनुसार समाज के विशेष आग्रह पर आज प्रशांत भैया जी हमारे नगर पधारे ओर हमे गोद भराई अनुमोदना का अवसर प्रदान किया है इस अवसर पर समाज के महानुभावों ने माताओं बहनों ने

भैया जी की सुखे मेवे फल फ्रूट आदि से गोद भराई कर मोक्ष मार्गी की अनुमोदना की प्रशांत भैया जी की जेनेश्वरी दीक्षा 26 अप्रैल रविवार को दोपहर 12 बजे पूज्य मुनि श्री मार्दव सागर जी महाराज के कर कमलों से सिद्धक्षेत्र वेजयन्तिगिरी तीर्थ पर सम्पन्न होगी आयोजन समिति द्वारा कार्यक्रम को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई है इस अवसर पर समाज के संरक्षक रमेश जैन समाज के अध्यक्ष आनंद जैन महामन्त्री कैलाश जैन चित्रलोक द्वारा भी समस्त साधर्मी जनो से निवेदन किया गया कि 26 अप्रैल को होने जा रहे दीक्षा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में सिद्धक्षेत्र वेजयन्तिगिरी पहुच कर दीक्षार्थी की अनुमोदना कर पुण्य लाभ अर्जित करें
