सांदीपनि विद्यालय में नवागत शिक्षकों के लिए हुआ ओरिएंटेशन कार्यक्रम सकारात्मक सोच के साथ करें शिक्षा का पुनीत कार्य- प्राचार्य

आष्टा। नगर के सांदीपनि (सी.एम. राइज़) शासकीय उमावि आष्टा में नवागत उच्च माध्यमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक एवं अतिथि शिक्षकों के लिए ओरिंएटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इन शिक्षकों द्वारा जुलाई एवं अगस्त 2026 में विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया गया है। सर्वप्रथम प्राचार्य सितवत खान ने समस्त नवागत शिक्षकों का स्वागत किया और कहा कि हमें सकारात्मक सोच के साथ शिक्षा का पुनीत कार्य करना है। शिक्षक केवल एक बच्चें को पढ़ाता ही नही है, बल्कि पीढ़ियों का निर्माण करता है।

हम सबकों शिक्षक होने पर गर्व होना चाहिए और शिक्षा के माध्यम से ही हम समाज को नई दिशा दे सकते है। प्राचार्य ने नवागत शिक्षकों से आव्हान किया कि अपनी ऊर्जा और ज्ञान का सदुपयोग करते हुए सांदीपनि विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं। अकादमिक समन्वयक अंत्येश धारवां ने कहा कि हमें अनुशासन का पालन करते हुए कार्य करना चाहिए। काउंसलर सम्राट ढोके ने नवागत शिक्षकों से कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अपार संभावना है और विद्यार्थियों को प्रेरित कर हम उनका उज्जवल भविष्य बना सकते है।

अंग्रेजी के वरिष्ठ शिक्षक भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि वरिष्ठ और अनुभवी शिक्षकों के अनुभवों का लाभ लेकर नए शिक्षक अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर सकते है। रसायन शास्त्र के वरिष्ठ शिक्षक जितेन्द्र मेवाड़े ने कहा कि वर्तमान युग प्रतियोगिता का युग है। इसलिए शिक्षकों को नई-नई तकनीकों का उपयोग करते हुए अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना चाहिए। जीवविज्ञान की वरिष्ठ शिक्षिका पदमा परमार ने ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नवागत शिक्षकों को सलाह दी कि कक्षा में पहुंचने से पहले अपने विषय का भली भांति अध्ययन करें और

टेक्नाॅलाजी का उपयोग करके अध्यापन को न केवल रूचिकर बल्कि फलदायी भी बनाया जा सकता है। अंत में प्राचार्य सितवत खान ने समस्त नवागत शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि अभी आपके कॅरियर की शुरूआत है और यदि आप मेहनत करते हुए अध्यापन करेंगें तो निश्चित तोर पर न केवल आप बहुत आगे बढ़ेंगे बल्कि आपकों आत्मीय संतोष भी प्राप्त होगा। ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नवागत शिक्षकों पूजा सिलोरिया, अंतिम मालवीय, कामिनी राठौर, मोनिका चैकसे, अतुल आर्य, सत्येन्द्र चैहान, सिफत खान, यतेन्द्र कुमार शर्मा, स्नेहलता पाल, तुलसीराम सरखंडे, विनोद पवार,

दीपिका दास, तनिष्क चन्द्रवंशी, राम सिंह वर्मा, राजेन्द्र मालवीय, महेश कुमार वर्मा, रजनी सोलंकी, लोकेन्द्र पैरवाल, हेमलता व्यास, ललिता राठौर, विवके कुमार अहिरवार, निधि पुरोहित, राजकुमारी संकत, प्रदीप राठौर, संगीता, राजू, कविता मेवाड़ा, साहिबा खान, रीतिका चैहान, नरेन्द्र सिंह ठाकुर, सुषमा कंकरायणें, राधा शर्मा, विशाल परमार, अजीम अंसारी, शोएब अली, राहुल परमार, अखलेश राय ने सहभागिता करी और कहा कि इस संक्षिप्त ओरिएंटेशन कार्यक्रम से उनकों नई ऊर्जा मिली है और प्राचार्य एवं वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा जो कार्य सौंपा जाएंगा उसे पूरी तन्मयता के साथ करेंगे और सांदीपनि विद्यालय आष्टा न केवल अकादमिक क्षेत्र में बल्कि खेलकूद, सांस्कृतिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक आदि क्षेत्रों में भी प्रगति करेंगा।

अपने हौसले बुलंद रखो, सत्य और ईमानदारी के मार्ग पर चलते रहो, क्योंकि जिस पर यह जग हंसा है, उसी ने इतिहास रचा है- श्री मिट्ठूपुरा सरकार

आष्टा। कौन कहता है, आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो दिल से उछालो यारो। अपने हौसले बुलंद रखो, सत्य और ईमानदारी के मार्ग पर अकेले चलते रहो। एक दिन तुम्हें तुम्हारा मुकाम मिल जाएगा। और काफिला खुद अपने आप बन जाएगा। क्योंकि जिस पर यह जग हंसा है, उसी ने इतिहास रचा है। उक्त बहुत ही प्रेरणादाई विचार सेंधव समाज धर्मशाला रुपेटा मे चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन व्यास पीठ से सुप्रसिद्ध भागवत कथाकार संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार द्वारा व्यक्त किए गए। आज कथा से पूर्व केसर सिंह ठाकुर द्वारा

संत श्री , संगीत कलाकार एवं धर्मशाला निर्माण में निस्वार्थ सेवा करने वाले सभी रुपेटा गांव के युवाओं का साफा बांधकर कर सम्मान किया। आगे महाराज श्री द्वारा भगवान श्री कृष्णा की समस्त बाल लीलाओं वर्णन किया। भगवान लगभग 11 वर्ष की आयु तक वृंदावन में रहे। इसके बाद कंस को मार कर महाराज उग्रसेन जी को मथुरा का राजा बनाया। और स्वयं शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन आए। सांदीपनि आश्रम में अपने बड़े भाई बलराम और सुदामा जी के साथ अल्प समय में ही सारी शिक्षा प्राप्त की। गुरु ग्रह पढ़न गए रघुराई। अल्पकाल विद्या सब पाई। 14 वर्ष तक भगवान मथुरा में रहे, इसी काल में कंस के ससुर मगध के राजा जरासंध ने 17 बार मथुरा पर आक्रमण किया।

हर बार युद्ध में जरासंध को हार का मुंह देखना पड़ा। और जब 18 वीं बार जरासंध ने आक्रमण किया, तो भगवान स्वयं रण छोड़कर भाग गए, और समुद्र के किनारे द्वारकापुरी नगरी बसाई, और जीवन के अंतिम काल 100 वर्ष भगवान द्वारिका में ही रहे। इस प्रकार भगवान इस धरा धाम पर 125 वर्ष रहे। आज कथा में भगवान श्री कृष्णा रुक्मणी जी का विवाह संपन्न कराया जाएगा । इस अवसर पर सौभाग्य सिंह अध्यापक सोनकच्छ जितेंद्र सिंह ठाकुर पिपलिया बक्सू मेहरबान सिंह सरपंच, अरविंद जयसवाल गोपाल सिंह ठाकुर अनार सिंह, राजेंद्र जैन,राजू सेठ भंवरा कोक सिंह पटवारी सहित बड़ी संख्या में माता बहनों ने कथा का रसपान किया।

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