सांदीपनि विद्यालय में त्रिदिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व का आयोजन, प्रदर्शनी के माध्यम से दिया कर्म का संदेश ‘‘कर्मण्येंवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’’ हमारा ध्येय वाक्य – प्राचार्य

आष्टा। नगर के सांदीपनि (सी.एम. राइज़) शासकीय उमावि आष्टा में शासन के निर्देशानुसार त्रिदिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व का आयोजन श्रृद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ किया गया। विद्यालय प्राचार्य सितवत खान ने बताया कि विद्यालयों में भारतीय संस्कृति परंपराओं नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के प्रति विद्यार्थियों में समझ विकसित करना इसका उद्देश्य था। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित विभिन्न कार्यक्रमों का प्रदर्शन बहुत ही उत्साह के साथ किया। प्रदर्शनी में विभिन्न कथानक प्रस्तुत किए गए। इनके माध्यम से बताया गया कि

श्रीकृष्ण ने अधर्म और अन्याय के विरूद्ध धर्म की स्थापना का संदेश दिया। भगवत गीता में श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्म का उपदेश दिया। श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, न्याय और सदाचार के साथ ही प्रेम, करूणा, भक्ति और मित्रता का सजीव उदाहरण है। प्राचार्य सितवत खान ने कहा कि ‘‘कर्मण्येंवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’’ हमारा ध्येय वाक्य होना चाहिए और हमें फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य करते रहना चाहिए। विद्यालय के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। शिक्षक मनोज कर्मोदिया ने कहा कि जन्माष्टमी हमें विश्वास दिलाती है,

कि अंत में सत्य और धर्म की विजय होती है। शिक्षक निर्मल बैरागी ने कहा कि यह पर्व मनुष्य को नकारात्मकता, लालच और अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा देता है। शिक्षक नवीन मौर्य ने कहा कि श्रीमद भगवत गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नही बल्कि जीवन को सही दिशा देना वाला एक महान ग्रंथ है। अकादमिक समन्वयक अंत्येश धारवां ने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हो उचित कर्म करना ही हमारा धर्म है। निर्मल बैरागी ने कहा कि जीवन में सफलता-असफलता, लाभ-हानि और सुख-दुख आते जाते रहते है हमें अपना मानसिक संतुलन बनाएं रखना चाहिए।

शिक्षक धीरज शर्मा ने कहा कि अपने कर्मो को केवल स्वार्थ और अहंकार से जोड़ने की बजाय उन्हें व्यापक कल्याण की भावना से करना चाहिए। शिक्षक प्रकाश यादव ने कहा कि गीता मन को मनुष्य का मित्र भी मानती है, और शत्रु भी। सकारात्मक मन जीवन की सही दिशा निर्धारित करता है। विद्यार्थियों ने श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित विभिन्न रचनाएं प्रस्तुत करी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के त्रिदिवसीय विद्यालयीन सफल कार्यक्रम के आयोजन पर सांदीपनि विद्यालय के समस्त शिक्षकों ने प्राचार्य सितवत खान का स्वागत सम्मान किया। प्राचार्य ने कहा कि हमें अपने कर्मो पर ध्यान देते हुए वसुधेव कुटुम्बकम की भावना रखनी चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन षिक्षक सतीश वर्मा एवं निर्मलदास बैरागी, मनोज कर्मोदिया द्वारा किया। त्रिदिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टी कार्यक्रम में शिक्षक असमा खानम, अंत्येश धारवां, सम्राट ढोके, पदमा परमार, जितेन्द्र मेवाड़े, भूपेन्द्र सिंह, रघुवीर सिंह, राखी पोहाने, गौतम चैरसिया, पवन कुमार राया, निहायत मंसूरी, नवीन मौर्य, मोनिका जैन, मनोज कर्मोदिया, नेहा अंसारी, मो. इमरान, राम सिंह, डाॅ. तेजपाल सिंह, अभिलाषा श्रीवादी, वीरेन्द्र सिंह, हरिनारायण सिंह, संदीप जायसवाल, पवित्रा कुराड़िया, आराधना चन्द्रवंशी, महेश नरगावा, प्रकाश यादव, रवि कुमार सोलंकी, शैलेन्द्र मालवीय, सीमा बघेल, अंतिमबाला हटिला, लक्ष्मी परमार,

आशा रावत, जसपाल सिंह, सपना मेवाड़ा, पूजा असाड़े, कृतिका वर्मा, नीता जैन, रामेश्वर दामड़िया, विजय हाटेकर, निर्मलदास बैरागी, जितेन्द्र कुमार वर्मा, हेमंत मेवाड़ा, दिनेश गहरवाल, राजेश मालवीय, राजीव सारसिया, मनोज बड़ोदिया, संतोष कुमार, गौरीशंकर मालवीय, कासिम खान, वंदना सोलंकी, रवि प्रकाश मालवीय, सुनील देलमिया, नीरज सिंह ठाकुर, प्रेम सिंह, विजय मंगल बगाना, निकिता शर्मा, श्वेता पांडेय, विजय अडगले, डी.एस. मांडवा, मुकुंद सिंह बरोड़िया, कुमेर सिंह ठाकुर, संध्या पटेल, सुरेश पाटीदार, अब्दुल हमीद अंसारी, फरजाना अंसारी, रईसा शाह, पवित्रा सारसिया, गजराज सिंह ठाकुर, लखनलाल परमार, मदन परमार, रमेश मेवाड़ा, संजय जैन, नौशीन जहां,

दीप्ति तोमर, एस.के. सिंगारिया, राजेश राठौर, आशीष विश्वकर्मा, प्रिया गोहे, आत्माराम सितोलिया, सीमा सोलंकी, संगीता सोनी, विनोद नागदा, राजकुमार, सतीश चक्रवर्ती, सत्यवंत सिंह परमार, अरविंद सिंह ठाकुर, वीरेन्द्र सिंह ठाकुर, नितेश राठौर, अंकित मेवाड़ा, संगीता राजपूत, संदीप राठौर, अखलेख राकां, संजेश परमार, हरिनारायण सिंह, जीवन सिंह, देशराज सरसैया, कोमल अहिरवार, ममता मालवीय, साधना परमार, जितेन्द्र वर्मा, गोपाल कोली, रितिका तिवारी, ललित कुमार, दीक्षा सूर्यवंशी, पूजा विश्वकर्मा, फूलकुंवर, पंकज कुमार, ज्योति विश्वकर्मा, स्वाति राठौर, रीना मेवाड़ा, संतोष, एस.के. सिंगारिया, राजेश राठौर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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