श्रीमती द्वारका मेश्राम की स्मृति में सांदीपनी स्कूल में शिक्षण सामग्री कि वितरण, स्मृति में जो अमूल्य कार्य किया है, वह हम सभी के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है- प्राचार्य सितवत खान

आष्टा – सहायक संचालक एवं मंडी सचिव नरेंद्र मेश्राम की माताजी, आदरणीय श्रीमती द्वारका मेश्राम का गत 6 जुलाई 2026 को देवलोक गमन हो गया था। आज उनकी पुण्यतिथि को एक माह पूरा होने पर, उनकी स्मृति को चिरस्थाई बनाते हुए एक अत्यंत प्रेरणादायक और मानवीय पहल की गई। इस पावन अवसर पर स्थानीय सांदीपनी शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, आष्टा के छात्र-छात्राओं को उनकी कक्षाओं में जाकर उपयोगी शिक्षण सामग्री का वितरण किया गया।

यह पूरा कार्यक्रम विद्यालय के प्राचार्य सितवत खान, राजीव सारसिया, श्वेता पांडे और संजय जैन के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस नेक कार्य का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में संबल प्रदान करना और दिवंगत आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करना था। शिक्षा के दीप जलाने की अनूठी पहल- कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों और शिक्षकों ने श्रीमती द्वारका मेश्राम के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इस अवसर पर मंडी सचिव नरेंद्र मेश्राम के साथ मंडी परिवार से अरविंद झवर, हरिनारायण पचलसिया, मनोज नागौरी, कुलदीप मेवाड़ा, रमेश चौरसिया, मांगीलाल विश्वकर्मा और सूरज मेवाड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन सभी गणमान्य नागरिकों ने विद्यार्थियों को कॉपियाँ, पेन और अन्य पठन-सामग्री अपने हाथों से वितरित की। बच्चों के चेहरों पर आई मुस्कान ने इस आयोजन को और भी अधिक भावुक और सार्थक बना दिया। विद्यालय प्राचार्य सितवत खान ने श्री नरेंद्र मेश्राम और उनके परिवार की इस संवेदनशील सोच की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि

“शोक को एक सकारात्मक और समाज-हितैषी दिशा देना ही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। नरेंद्र मेश्राम जी ने अपनी माताजी की स्मृति में जो अमूल्य कार्य किया है, वह हम सभी के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। शिक्षा के क्षेत्र में किया गया यह सहयोग न केवल बच्चों का भविष्य संवारता है, बल्कि ऐसे संस्कारों को हमें अपने दैनिक जीवन और आचरण में भी अवश्य शामिल करना चाहिए। इस प्रकार के आयोजन समाज में करुणा, आत्मीयता और परोपकार की भावना को मजबूत करते हैं।” कार्यक्रम के अंत में सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और संकल्प लिया कि वे समाज के उत्थान के लिए ऐसे सेवा कार्यों में हमेशा अपनी सहभागिता निभाते रहेंगे।

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