

आष्टा। साथ चले, मिलकर बोले और उसी सनातन मार्ग का अनुसरण करें। जिस पर हमारे पूर्वज चले हैं। क्योंकि जिस मार्ग पर मीरा, तुलसी, नानक,रविदास, सूरदास, कबीर चले। वह मार्ग कभी गलत नहीं हो सकता। इसलिए धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना। धैर्य रखें भगवान के घर देर है। पर अंधेर नहीं।सब कुछ सही समय पर आपके पास आएगा। धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सो घडा ऋतु आए फल होय। उपरोक्त बहुत ही सुंदर भाव शांति नगर में चल रही सात दिवसीय संगीत में

श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन श्री राम कथा भागवत कथा के सरस वक्ता संत श्री मिट्ठूपुरा सरकार द्वारा व्यक्त किए गए। आगे महाराज श्री द्वारा देश दुनिया में चल रही सभी ज्वलंत समस्याओं की ओर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। इन सभी समस्याओं से भारत भी अछूता नहीं है। इसलिए भारत की एकता अखंडता के लिए सभी सनातनियों को एक होने की परम आवश्यकता है। भेदभाव समाप्त करना है। जात पात की करो विदाई। हिंदू हिंदू भाई-भाई।

इसके साथ ही भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह का बहुत ही सुंदर वर्णन किया। बेटी की विदाई के मार्मिक प्रसंग को सुनकर माता बहनों की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी। गुरुदेव द्वारा बताया गया कि, व्यक्ति के जीवन में दो बार भयंकर कष्ट होता है। एक तो जब बेटा मुख मोडे, दूसरा जब बेटी घर छोड़े। आज गुरुवार को कथा का समय प्रातः 10:00 बजे से 1:00 तक 1:00 बजे से विशाल भंडारा आप सभी सादर सापरिवार आमंत्रित। इस अवसर पर पुष्पेंद्र ठाकुर, शिव श्री वादी,नारायण सिंह हरनावदा, जोजन सिंह ठाकुर, सुनील बैरागी सहित बड़ी संख्या में पधारे हरि भक्तों ने कथा का रसपान किया।


