पुष्पा सीनियर हायर सेकंडरी विद्यालय में विद्यार्थियों को दिए जीवन निर्माण के सूत्र, मोबाइल की बजाय ज्ञान और संस्कारों को दें महत्व, तभी बनेगा उज्ज्वल भविष्य : पन्यास प्रवर यशोजित विजयजी महाराज

फोटो मुनिश्री यशोजित विजयजी महाराज का विद्यालय के प्राचार्य फादर मेल्विन सीजे अभिवादन कर जानकारी देते हुए।फोटो मुनिश्री यशोजीत विजय जी महाराज बच्चों को संबोधित करते हुए।आष्टा। विद्यार्थियों का जीवन केवल अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन, सत्यनिष्ठा और चरित्र निर्माण को भी अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। आज के दौर में बच्चों का बढ़ता मोबाइल उपयोग चिंता का विषय है। यदि विद्यार्थी मोबाइल और मनोरंजन में व्यतीत होने वाला समय अध्ययन,

स्वाध्याय और आत्मविकास में लगाएं तो उनका भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल बन सकता है। यह प्रेरणादायक उद्बोधन परम पूज्य न्याय विशारद आचार्य देव श्रीमद् विजय चंद्रगुप्त सूरीश्वरजी महाराज के शिष्यरत्न परम पूज्य पन्यास प्रवर यशोजित विजयजी महाराज ने नगर के पुष्पा सीनियर हायर सेकंडरी विद्यालय में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।उक्त जानकारी चातुर्मास समिति के प्रवक्ता अभिषेक सुराणा ने देते हुए बताया किविद्यालय परिसर में पहुंचने पर प्राचार्य फादर मेल्विन सीजे एवं

स्टाफ द्वारा मुनिश्री का आत्मीय स्वागत किया गया। श्री सुराणा ने बच्चों के संबोधन की जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की उपस्थिति में आयोजित विशेष प्रेरक सत्र में मुनिश्री ने बच्चों को जीवन में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ श्रेष्ठ इंसान बनने की सीख दी।मुनिश्री यशोजित विजय महाराज ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का पहला कर्तव्य अपने माता-पिता का सम्मान करना और उनकी आज्ञा का पालन करना है। माता-पिता हमारे जीवन के प्रथम गुरु होते हैं, जिनके त्याग और समर्पण से हमारा जीवन संवरता है। जो बच्चे अपने माता-पिता का आदर करते हैं, वे जीवन में अवश्य सफल होते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल के दुष्प्रभावों से सावधान करते हुए कहा कि आज अधिकांश बच्चे घंटों मोबाइल पर कार्टून, गेम और अन्य मनोरंजक सामग्री देखने में अपना अमूल्य समय व्यर्थ कर देते हैं। यह समय यदि पढ़ाई, अच्छी पुस्तकों के अध्ययन, खेलकूद या रचनात्मक गतिविधियों में लगाया जाए तो व्यक्तित्व का समग्र विकास संभव है। मोबाइल सुविधा का साधन है, लेकिन उसका अति उपयोग विद्यार्थियों की एकाग्रता और भविष्य दोनों को प्रभावित करता है।मुनिश्री ने बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और

उसे निखारने की प्रेरणा देते हुए कहा कि पेंटिंग, संगीत, लेखन, वाचन और अन्य कलाएं व्यक्ति के व्यक्तित्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती हैं। उन्होंने एक कलाकार का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार उसने भगवान श्रीकृष्ण का सुंदर चित्र बनाकर उसे अपने पूजास्थल में स्थान दिया और अपनी कला को साधना का माध्यम बनाया। हर बच्चे के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, आवश्यकता उसे पहचानने और विकसित करने की है।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि शिक्षक का स्थान अत्यंत ऊंचा है। शिक्षक केवल विषयों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे विशेष रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त ध्यान दें, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके।अपने प्रेरक संबोधन में मुनिश्री ने कहा कि बच्चों को केवल अच्छे विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि देश के आदर्श नागरिक बनने का भी संकल्प लेना चाहिए।

सत्य बोलना, ईमानदारी से जीवन जीना, अनुशासन का पालन करना और समाज व राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझना प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य है। उन्होंने बच्चों को सभी प्रकार के व्यसनों से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि व्यसन व्यक्ति के जीवन, परिवार और भविष्य को नष्ट कर देते हैं।मुनिश्री ने क्रोध पर नियंत्रण रखने की सीख देते हुए कहा कि पलभर का गुस्सा वर्षों की मेहनत और रिश्तों को समाप्त कर सकता है। क्रोध व्यक्ति की विवेक शक्ति को समाप्त कर देता है, इसलिए धैर्य, संयम और क्षमा का मार्ग अपनाना चाहिए। जो व्यक्ति अपने मन और भावनाओं पर नियंत्रण कर लेता है,

वह जीवन की बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना सहजता से कर सकता है।अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, सकारात्मक सोच, सदाचार, सेवा भावना और आत्मानुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक मुनिश्री के विचारों को सुना और उनसे प्रेरणा प्राप्त की। विद्यालय परिवार ने मुनिश्री के मार्गदर्शन को विद्यार्थियों के जीवन निर्माण की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Scroll to Top