
इस साल ज्येष्ठ मास में ही अधिक मास का आरंभ हो रहा है। अधिक मास जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। नगरपुरोहित पं मनीष पाठक ने बताया कि पुरुषोत्तम मास हर 4 वर्ष में एक बार लगता है। इस बार अधिक मास लग जाने के कारण ज्येष्ठ मास 30 नहीं बल्कि पूरे 60 दिन का होगा। यानी इस साल 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे। बता दें कि पुरुषोत्तम मास 17 मई से लेकर 15 जून तक चलेगा। शास्त्रों में इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, इस महीने में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी विवाह, गृह प्रवेश आदि कार्य वर्जित होते हैं। हालांकि, इस बार करीब 27 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम मास लगा है। आइए जानते हैं पुरुषोत्तम मास/ अधिक मास के दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए। जानें इस महीने में क्या करें क्या न करें।

अधिक मास / पुरुषोत्तम मास में क्या करें
पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसे में इस महीने भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा अर्चना करें। इस दौरान ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जप रोजाना करें।
इस महीने विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें।
पुरुषोत्तम मास में जरुतमंद लोगों को वस्त्र, फल, सब्जी और जल से भरे घड़े का दान करं।
इस महीने में खासतौर पर कांसे के बर्तन का दान करें और मालपुए का दान करें।
इस महीने में पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। अगर आपके घर के पास कोई पवित्र नदी हो तो वहां स्नान करें वरना अपने घर पर ही थोड़ा जल डालकर घर पर ही स्नान कर सकते हैं।
इस महीने में श्रीमद्भागवत कथा या गीता का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से मन को सुकून और शांति मिलती है।

अधिक मास / पुरुषोत्तम मास में न करें ये काम
अधिक मास के दौरान सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन आदि कार्य नहीं करने चाहिए।
अधिक मास में भूलकर भी नया काम आदि शुरु नहीं करना चाहिए।
भगवान विष्णु समर्पित अधिक मास में तामसिक भोजन जैसे लहसुन प्याज का त्याग करें।
किसी से झूठ न बोलें न ही किसी का अपमान करें। ऐसा करने से आपके पुण्य फल नष्ट हो जाते हैं।
अधिक/ पुरुषोत्तम मास क्यों लगता है

नगरपुरोहित पं डॉ दीपेश पाठक बताते है कि अधिक मास हिंदू पंचांग की गणना के कारण लगता है। चंद्र कैलेंडर के अनुसार, वर्ष लगभग 365 दिन का होता है। चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। इस तरह हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बन जाता है। यह अंतर धीरे धीरे बढ़ते हुए करीब 32 महीने और 16 दिन का हो जाता है। यह अंतर लगभग पूरे एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को ठीक करने के लिए हिंदू पंचांग में एक और महीना जोड़ जिया जाता है जिसे अधिक मास, मलमास, या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) 2026 में 17 मई से 15 जून तक रहेगा। यह माह भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसमें 33 की संख्या में दान (विशेषकर मालपुए, दीप, वस्त्र) और श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। कृष्ण पक्ष में पितृ दोष निवारण के लिए दान और शुक्ल पक्ष में सुख-समृद्धि हेतु 33 वस्तुओं का दान करें।
कृष्ण पक्ष का दान
(1) घी से भरा चांदी का दीपक (2) सोना या कांसे का पात्र (3) कच्चे चने (4) खारेक (5) गुड़, तुवर दाल (6) लाल चंदन (7) मीठा रंग (8) कपुर, केवड़े की अगरबत्ती (9) केसर (10) कस्तूरी (11) गोरेचन (12) शंख (13) गरूड़ घं टी (14) मोती या मोती की माला (15) हीरा या पन्ना का नग

शुक्ल पक्ष का दान
(1) माल पुआ (2) खीर भरा पात्र (3) दही (4) सूती वस्त्र (5) रेशमी वस्त्र (6) ऊनी वस्त्र (7) घी (8) तिल गुड़ (9) चावल (10) गेहूं (11) दूध (12) कच्ची खिचड़ी (13 ) शक्कर व शहद (14) तांबे का पात्र (15) चांदी का नन्दीगण
राशि के अनुसार दान:
मेष/वृश्चिक: गुड़, लाल कपड़े, तांबा, मालपुए।
वृषभ/तुला: चावल, सफेद वस्त्र, चीनी, दही।
मिथुन/कन्या: हरी मूंग दाल, हरे वस्त्र, कांस्य के बर्तन।
कर्क: दूध, खीर, चांदी के पात्र।
सिंह: तांबा, गेहूं, धार्मिक पुस्तकें।
धनु/मीन: चने की दाल, पीले कपड़े, हल्दी।
मकर/कुंभ: काले तिल, लोहे की वस्तुएं, सरसों का तेल।
नगरपूरोहित परिवार आष्टा