

updatenews247.com धंनजय जाट आष्टा 7746898041- “जब समाज किसी को भुला देता है, तब मानवता उसे फिर से जीने का हौसला देती है — और इसी मानवता की मिसाल एक बार फिर संस्था प्रियू फाउंडेशन की टीम ने पेश की।” सीहोर जिले के हीरापुर क्षेत्र में पिछले कई दिनों से एक अज्ञात मानसिक रूप से अस्वस्थ बुजुर्ग महिला लावारिस अवस्था में सड़कों पर भटक रही थी। न रहने का ठिकाना, न खाने का सहारा, और न ही कोई अपना — वह महिला भूख, बीमारी और असुरक्षा के बीच हर दिन संघर्ष कर रही थी।

राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों ने कई दिनों तक उसकी हालत देखी, लेकिन मदद का कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा था। अंततः कुछ संवेदनशील लोगों ने प्रियू फाउंडेशन से संपर्क कर इस स्थिति की जानकारी दी। सूचना मिलते ही संस्था प्रियू फाउंडेशन की टीम ने बिना समय गंवाए तुरंत कार्रवाई की। संस्था के सक्रिय सदस्य अजय नागदा, आदिल शेख, प्रदीप यादव और विशाखा जी सुनील जाटव अपनी टीम के साथ हीरापुर पहुँचे। महिला की हालत अत्यंत दयनीय थी — मानसिक रूप से

अस्वस्थ होने के कारण वह डरी-सहमी और असुरक्षित स्थिति में थी। टीम ने पूरे धैर्य, प्रेम और संवेदनशीलता के साथ महिला को संभाला, उसे भरोसा दिलाया और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के बाद महिला को तुरंत इंदौर लाया गया, जहाँ मानसिक चिकित्सालय में भर्ती कराकर उसके उपचार की व्यवस्था की गई। अब डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है, उसे भोजन, दवाइयाँ और सुरक्षित वातावरण मिल रहा है — जो शायद उसे कई समय से नसीब नहीं हुआ था। यह केवल एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि एक भूली हुई जिंदगी को

फिर से सम्मान और सुरक्षा देने का प्रयास है। सड़क पर बेसहारा भटक रही एक बुजुर्ग महिला को अब इलाज, देखभाल और इंसानियत का सहारा मिला है। प्रियू फाउंडेशन की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि अगर हम अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों को अनदेखा न करें और समय पर मदद का हाथ बढ़ाएँ, तो कई ज़िंदगियाँ फिर से मुस्कुरा सकती हैं। मानवता की सेवा का यह सफर आगे भी जारी रहेगा, ताकि कोई भी जरूरतमंद खुद को अकेला और लावारिस महसूस न करे।”

