

updatenews247.com धंनजय जाट केन्द्रीय बजट में देवास संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आष्टा विधान सभा क्षेत्र में रेलवे लाइन की बहुप्रतीक्षित मांग को लेकर कोई प्रावधान नही किया गया है। इससे क्षेत्र की जनता एक बार फिर खुद को ठगा सा महसूस कर रही है। क्षेत्रीय सांसद से ले कर भाजपा के नेता इस मुद्दे को भुनाते जरूर है लेकिन उस पर कोई अमल नही करते यह मुद्दा सीधे सीधे क्षेत्रीय सासंद की योग्यता और उनकी इच्छाशक्ति पर भी सवाल खड़ा करता है आष्टा में रेलवे सिर्फ भावनात्मक मुद्दा नही है बल्कि यह इस उपजाऊ क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए बहुत जरूरी हैं।

पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार ने बजट में आष्टा क्षेत्र के लिए हुई नाइंसाफी को चिन्हित करते हुए क्षेत्रीय सांसद और केन्द्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए है। लोगो का आरोप है कि सासंद ने संसद और रेल मंत्रालय के सामने क्षेत्र की मांग को मजबूती से नही रखा, जिसका नतीजा यह रहा कि बजट में क्षेत्र की पूरी तरह अनदेखी कर दी गई। रेल सुविधा के अभाव में क्षेत्र के हजारो नागरिक वर्षो से परेशान है, विद्यार्थियो को पढाई, मरीजो का ईलाज और व्यापारियो को कारोबार के लिए दूसरे शहर पर निर्भर रहना पड़ रहा है इसके बावजूद सांसद द्वारा केवल आश्वासन दिये गये जमीनी स्तर पर कोई परिणाम नही दिखा है।

श्री परमार ने कहा कि वर्तमान सत्ता तंत्र के लिए यह मुद्दा क्षेत्र की जनता के भावनात्मक शोषण का जरिया मात्र बन कर रह गया है। ’’घोषणा करो और बदले में वोट पाओ’’ यह सिलसिला पिछले 42 वर्षों से लगातार चला आ रहा है। हर बजट में अपनी उम्मीदों पर होते तुषारापात के मद्देनजर यह सवाल भी खड़े होने लगे हैं कि सांसद महोदय क्षेत्र की आवाज संसद में उठाते भी हैं या नही? रेलवे की वर्षों पुरानी मांग भी आष्टा वासियों यूँ ही नही करते हैं। सबसे पहले इस इलाके की सांसद रही उमा भारती ने अपनी चुनावी सभा मे घोषणा करके इस मुद्दे पर लोगो को लुभा कर वोट बटोरे थे।

पिछली दो बार से सांसद महेंद्र सिंह सौलंकी ने अपने दोनों ही चुनावो में आष्टा में रेलवे लाइन के इस मुद्दे को सफलता से भुनाया है लेकिन उन्होंने क्षेत्रवासियों की जरूरत और भावना को सरकार के सामने उठाने का साहस दिखाया भी है या नही यह अब अनुसंधान का विषय है। रेलवे की मांग पर क्षेत्रवासियों की मांग को कोरे आश्वासन की तह में लपेट कर रखते भाजपा के सत्ता तंत्र पर सवाल खड़े करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य तथा पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार ने जनता के साथ एक बार फिर हुई ठगी पर भाजपा शासन को आड़े हाथ लिया है। श्री परमार का कहना है कि जरूरत के मुताबित

नई रेलवे लाईन बिछाने के बजाये चुनिंदा उद्योगपतियो के फायदे के लिए द्रुतगामी कोरिडोर बनाने का प्रावधान घी में घी डालने जैसा हैं। श्री परमार का आरोप है कि क्षैत्र में भाजपा के स्थानीय सांसद और जनप्रतिनिधियो की उदासीनता के चलते अनैक विकास योजनाये पड़ोसी संसदीय क्षैत्र में जाने का सिलसिला रहा है। इधर लोगो का कहना है कि केन्द्रीय बजट से आष्टा की वर्षो पुरानी रेलवे ट्रेक की मांग ही गायब नही है बल्कि खुद सांसद महोदय भी महीनो से गायब दिखाई देते है। सासंद जनता और सत्ता के बीच सेतु का काम करते है लेकिन क्षेत्र में उनका लगातार नदारत रहना चर्चा का विषय है।
