मुक्ति सागर जी ने अपने तप बल से मुक्ति रमा को वर लिया- मुनि विश्वसुर्य सागर, मुनि श्री मुक्ति सागर महाराज विनयांजलि सभा, गुरु भक्तों ने किया गुरु गुणानुवाद

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updatenews247.com धंनजय जाट आष्टा 7746898041- आष्टा नगर के जन जन के ह्रदय में बसे समाधि सम्राट समाधिष्ठ मुनि श्री भूतबलि सागर जी महाराज के पथानुगामी शिष्य पूज्य मुनि श्री मुक्ति सागर जी महाराज का विगत दिवस पिड़ावा में उत्कृष्ट परिणामो के साथ समाधि मरण सम्पन्न हुआ मुनि श्री ने 16 दिवस की यम सल्लेखना पूर्ण कर समाधि मरण सम्पन्न हुआ जिंसमे देश भर के गुरु भक्तों ने पहुच कर मुनि श्री के दर्शन कर जीवन को धन्य किया है यहां उल्लेखनीय है कि पूज्य मुनि श्री का आष्टा नगर में तीन बार चातुर्मास का लाभ समाज को प्राप्त हुआ है

जिसमे भूतबलि सागर महाराज संघ चार साधुगणो द्वारा अभूतपूर्व प्रभावना हुई है मुनि श्री के समाधि सल्लेखना होने से समस्त गुरु भक्तों की आँखे नम है दिव्योदय जैन तीर्थ किला मंदिर में विनयांजलि सभा को सम्बोधित करते हुए पूज्य मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने कहा कि उनकी यादों को उनके शिष्य बता रहे है की किस तरह का ज्ञान हमे मुनि श्री ने दिया है विरले ही लोग होते है जो गुरु के दिल मे बस जाते है बहुत प्रयास किया उन्होंने आपको बदलने का पर हम नही बदल पाए उन्होंने अपना जीवन बदल लिया उनका जीवन का पल पल साधना में लगा था उन्होंने अपनी साधना के बल पर इस पर्याय को जीत कर मनुष्य पर्याय सार्थक कर ली है

मुनि श्री विश्वसुर्य सागर महाराज ने कहा कि मुक्ति सागर महाराज ने अपने तप बल से मुक्ति रमा को वर लिया है वे अब इस पंचम काल मे जन्म नही लेंगे जीवन कैसे जीना चहिये ये आपको मुक्ति सागर बता कर चले गए जिन महान आत्माओं का गुणगान कर रहै हो जिनके सानिध्य में तुम रहे हो उनके सानिध्य से तुमने क्या पाया है केवल गुणगान करने से ही कुछ नही होगा उन्होंने क्या कहा उसे धारण करना होगा अगर हमारे अंदर छल कपट मायाचारी निरन्तर चल रही है तो हमारा गुणगान करना सब बेकार है श्रद्धा भी अपने अंदर लाओ हमारे गुरु हमे क्या देकर गए है यह ध्यान रखो यदि ग्रहस्थ निर्ग्रन्थ वेश को धारण करता है तो बआज तुमने जिस महान आत्मा का गुणगान किया है तो यही कहूंगा कि उन्होंने जैसा मार्ग बताया है उसे अनुशरण करे

सुरेंद्र जैन ने कहा कि मुनि श्री ने संयम के पथ पर बढ़कर दक्षिण भारत के गाडिकॉप ग्राम में जन्म लेकर उत्तर भारत मे जिन धर्म की प्रभावना की है जिनकी साधना आगम के अनुकूल थी चतुर्थकालीन चर्या से आज भी पूरा संघ देश मे जाना जाता है मुकेश बड़जात्या ने कहा कि मोन सागर जी ने मोन रहकर मोन साधना से अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त किया उन्होंने आष्टा समाज को बहुत कुछ दिया है जो कि हम उनके उपकार को शब्दो मे हम बखान नही कर सकते संतोष जैन जादूगर मनीषा जैन धीरज जैन नीलबड़ रमेश जैन आदिनाथ सन्दीप जैन चाय समाज के अध्यक्ष आनंद जैन अभिषेक जैन इन्दौर आदि ने सम्बोधित किया कार्यक्रम का संचालन महामन्त्री कैलाश जैन चित्रलोक ने किया

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