आष्टा में आज आशीर्वाद पार्टी हॉल में धूमधाम से मनाई जाएगी ‘हरियाली तीज’, प्रकृति, संस्कृति और उल्लास का पर्व है ‘हरियाली तीज’- श्वेता श्रीवास्तव

आष्टा- आज दिनांक 13 अगस्त 2026 (बुधवार) को प्रकृति, संस्कृति और सौंदर्य के पर्व हरियाली तीज’ का आयोजन जिला सीहोर के आष्टा में किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक और उल्लासपूर्ण कार्यक्रम स्थानीय ‘आशीर्वाद पार्टी हॉल’ (माता मंदिर रोड, गांधी चौक, आष्टा) में आयोजित हो रहा है, जहाँ सुबह से ही महिलाओं और बच्चों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।कार्यक्रम का समय सुबह 11:00 बजे से दोपहर 04:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें मंच संचालन (एंकरिंग) और अपनी सुरीली आवाज से समां बांधने के लिए प्रसिद्ध गायिका ईशा अवलेशिया विशेष रूप से उपस्थित रहेगी। इसी के साथ इस शानदार आयोजन की संयोजिका श्वेता श्रीवास्तव हमें आगे बताया कि हैं।

गायिका ईशा अवलेशिया द्वारा बेहतरीन एंकरिंग और मनमोहक प्रस्तुतियां। कार्यक्रम के दौरान रोमांचक डांस कॉम्पिटिशन (नृत्य प्रतियोगिता) और फन गेम्स का आयोजन। उपस्थित महिलाओं और बच्चों के लिए सरप्राइज गिफ्ट्स (Surprise Gifts) और विशेष आकर्षक पुरस्कार (More Prizes)। इस आयोजन में प्रवेश शुल्क महिलाओं के लिए ₹100/- और बच्चों के लिए ₹50/- रखा गया है। परंपरा, प्रेम और प्रकृति की हरियाली के बीच यह उत्सव महिलाओं के लिए आपसी मेल-मिलाप और सांस्कृतिक आनंद का एक बेहतरीन मंच साबित होगा इसी उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

मां नेवज नदी के उद्गम स्थल व पुरातत्विक धरोहर देवांचल धाम देव बड़ला पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह भगतजी ने बताया सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं। इस दिन स्नान, दान और शिव पूजन और पितृों का तर्पण किया जाता है। इस दिन शिव पूजन का भी विशेष महत्व है, क्यों कि यह सावन की अमावस्या है, इस दिन भगवान शिव को बेलपत्र, फल आदि अर्पित कर उनका रुद्राभिषेक कराना भी उत्तम रहता है। इस अमावस्या का नाम ही हरियाली अमावस्या है, इस दिन पेड़ लगाने से भी शुभ फल मिलता है।

खासकर आम, आंवला, बड़ का पेड़ आदि लगाने चाहिए। इस दिन सबसे पहले स्नान करके काले तिल और जल से पितरों का तर्पण देना चाहिए, इससे पितर प्रसन्न होते हैं। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। हरियाली अमावस्या के दिन पितरों के नाम की दीपदान बहुत शुभ माना जाता है। पितरों के लिए किसी तालाब या पवित्र नदी के किनारे अपने पितरों के नाम का दीपक जरूर जलाएं । इसके अलावा शाम के समय आप पीपल के पेड़ के पास भी दीपक जला सकते हैं, क्योंकि इसमें ब्रह्मा विष्णु, महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है। इससे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है।

देवबड़ला स्मारक इंचार्ज कुंवर विजेंद्र सिंह भाटी ने बताया
हरियाली अमावस्या का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है. यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि हम प्रकृति के ऋणी हैं और हमें इसे सुरक्षित रखने के लिए पूरा प्रयास करना चाहिए। विंध्याचल पर्वत कि नाभि स्थल पर बसा देव बड़ला क्षेत्र की सबसे बड़ी और प्राचीन धरोहर है यहां चारों तरफ हरियाली और गहरी सुख शांति के साथ अनंत आस्था मन में लिए श्रद्धालु नेवज नदी के जल से स्नान कर

बाबा विलवेश्वर महादेव को जल अर्पण करने बड़ी संख्या में पहुंचते हैं आज हरियाली अमावस्या के पवन पर्व पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान कर बाबा विलवैश्वर महादेव का अभिषेक कर क्षेत्र की सुख शांति व समृद्धि के लिए मंगल कामनाएं की यूं तो यह स्थान पहले से ही लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है परंतु पुरातत्व विभाग द्वारा यहां पर खुदाई कर अनेक प्रतिमा व मंदिरों के बेस को जब मलबे में बहार किया क्षेत्रवासी अशचार्यचकित हो गए जब भी यहां श्रद्धालु आते हैं हर बार कुछ नया देखने को मिलता है पुरातत्व विभाग अपना काम कर रहा है।

श्रावण के दूसरे सोमवार पर उमड़ा आस्था का सैलाब, पार्वती नदी के उद्गम से निकली कावड़ यात्रा का गंज चौराहे पर भव्य

आष्टा- पवित्र श्रावण मास के द्वितीय सोमवार के पावन अवसर पर संपूर्ण क्षेत्र में भगवान भोलेनाथ के भक्तों में अपार उत्साह और भक्ति का माहौल देखा गया। तड़के से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी, जहां हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। प्रातःकाल से शुरू हुआ कावड़ यात्राओं का सिलसिला देर शाम तक निरंतर जारी रहा।मां पार्वती नदी के उद्गम स्थल से रवाना हुआ जत्था – श्रावण सोमवार के विशेष पर्व पर ग्राम बालाखेड़ा स्थित मां पार्वती नदी के पवित्र उद्गम स्थल से कावड़ियों का एक विशाल जत्था जल भरकर रवाना हुआ। बोल बम के नारों और धार्मिक ध्वजों के साथ निकला

यह जत्था क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होता हुआ आगे बढ़ा। कावड़ यात्रा पटाड़ा चौहान, खजुरिया कासम, नीलबड़ सहित आसपास के कई ग्रामीण अंचलों से गुजरी, जहां स्थान-स्थान पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर कावड़ियों का उत्साहवर्धन किया। गंज चौराहा पर नपाध्यक्ष प्रतिनिधि रायसिंह मेवाड़ मित्र मंडल द्वारा कावड़ यात्रा में शामिल पूर्व मार्केटिंग अध्यक्ष कृपालसिंह पटाड़ा, सवाईसिंह ठाकुर, वीरेंद्रसिंह ठाकुर, अभिराज पटाड़ा सहित अन्य कावड़ियों का पुष्पमालाएं पहनाकर और दुपट्टा डालकर स्वागत किया। इस अवसर पर पुखराजमल मेहता, देशचंद्र वोहरा, मनीष धारवां, सुमित मेहता, पवन वर्मा, पूरणसिंह मेवाड़ा आदि मौजूद थे।

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