आचार्य श्री के प्रेरणादायी सान्निध्य से गूंजा डीडब्ल्यूपीएस विद्यालय परिसर, विद्यार्थियों को मिले संस्कार और जीवन मूल्यों के संदेश

धंनजय जाट आष्टा 7746898041- देहली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल में शनिवार का दिन उस समय विशेष बन गया, जब परम पूज्य श्वेतांबर जैन धर्म के वाणी के जादूगर आचार्य भगवंत श्री जीतरत्न सागर सूरीश्वर महाराज जी का पावन आगमन हुआ। उनके आगमन की सूचना मिलते ही विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों एवं स्टाफ के बीच हर्ष और उत्साह का वातावरण निर्मित हो गया।आचार्य श्री के सान्निध्य में आयोजित विशेष संवाद सत्र में विद्यार्थियों को जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों, संस्कारों एवं आदर्शों से परिचित होने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में आचार्य श्री ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को विस्तारपूर्वक समझाते हुए

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कहा कि “गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का कार्य करते हैं। जिनके जीवन में गुरु का मार्गदर्शन होता है, वे कभी भटकते नहीं हैं।”उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश दिया। आचार्य श्री ने कहा कि आधुनिकता को अपनाना गलत नहीं है, लेकिन अपनी जड़ों और संस्कारों को भूल जाना उचित नहीं है।आचार्य श्री ने विद्यार्थियों को नशे एवं बुरी आदतों से दूर रहने की सीख देते हुए

कहा कि “युवा अवस्था जीवन की नींव होती है, यदि इस समय सही दिशा मिल जाए तो जीवन सफल बन जाता है।” उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं को संबोधित करते हुए मर्यादा, संस्कृति और आत्मसम्मान को बनाए रखने की प्रेरणा दी।अपने आशीष वचनों में आचार्य श्री ने कहा कि “संस्कार ही मनुष्य की वास्तविक पहचान हैं। शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसमें नैतिकता और अनुशासन का समावेश हो।”इस प्रेरणादायी संवाद का विद्यार्थियों पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने गुरुजनों एवं बड़ों का सदैव सम्मान करेंगे तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर

अपने जीवन को सफल बनाएंगे।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंहा ने आचार्य श्री का स्वागत करते हुए भारतीय एवं जैन परंपरा अनुसार वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि “आज हमारा यह सरस्वती मंदिर और अधिक पावन हो गया है, क्योंकि संतों के चरणों का स्पर्श इस भूमि को प्राप्त हुआ है। आपका आशीर्वाद सदैव हमारे विद्यालय एवं विद्यार्थियों पर बना रहे।”इस अवसर पर समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे और सभी ने आचार्य श्री के सान्निध्य को अपने जीवन का सौभाग्य बताया।

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