सिंहस्थ 2028 उज्जैन में आष्टा की महती भूमिका रहेगी, जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरी

updatenews247.com धंनजय जाट आष्टा 7746898041- आष्टा भारत के ह्रदय में बसा है और संत समाज के भी ह्रदय में विशेष स्थान रखता है । क्षिप्रा ,पार्वती , नेवज और पापनाशिनी जैसी सलिलाओं के पुण्य प्रवाह में अवगाहन करती मालवा वासियों की निष्ठा और आष्टा की आस्था से सदैव अभिभूत हूँ । आस्था की नगरी आष्टा और वहाँ के भक्तजन सचमुच अनूठे हैं । यह उद्गार आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने सालासर बालाजी धाम राजस्थान में प्रभु प्रेमी संघ के प्रतिनिधि मंडल से चर्चा में व्यक्त किये ।

प्रभु प्रेमीसंघ आष्टा के अनन्य सदस्य तथा प्रखर गुरु भक्त राजकुमार एवं जितेंद्र साहू ने परिवार सहित भेंट कर नगरवासियों की ओर से पूज्य स्वामी जी की चरण वंदना करके उन्हें आष्टा नगर पधारने का आमंत्रण दिया । ज्ञातव्य है कि नगर में स्वामी जी की कथाओं में प्रथम कथा श्रावक राजा परीक्षित की भूमिका में रहे जितेंद्र साहू संग श्रीमती शालिनी साहू तथा उनके परिवार की प्रभुप्रेमी संघ द्वारा आयोजित अन्य धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका रहती है । साहू परिवार के अग्रज राजकुमार साहू श्री मति रीना साहू जितेंद्र साहू श्रीमती शालिनी साहू एडवोकेट,

मास्टर आनन्द ,उत्सव के साथ ही संजय चौरसिया राहुल मेवाड़ा आदि ने भी पूज्य अवधेशानन्द जी से भेंट करके आष्टा नगर में हाल ही में प्रभुप्रेमी संघ के बैनर तले “ये चमक ये दमक फुलवन में महक” फेम पंडित सुधीर व्यास की भजन संध्या एवम सभी गतिविधियों का प्रतिवेदन देकर पूज्य स्वामी जी से सिंहस्थ 2028 के पूर्व नगर प्रवास का अनुरोध किया । बताते चलें कि भारत की सांस्कृतिक धार्मिक तथा सनातन परम्पराओं और लोक पर्वों के नीति निर्देशक तथा आध्यात्मिक चेतना के उन्नायक जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरी जी महाराज की

महनीय कृपा आष्टा नगर पर सदैव बरसती रहती है आचार्य महामंडेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी महाराज की पावन उपिस्थति में उज्जैन में ईस्वी वर्ष 2028 में सिंहस्थ आयोजित होने जा रहा है। स्वामी जी ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ में पूर्व के सिंहस्थ से बढ़कर आष्टा वासियों को श्रेष्ठ भूमिका मिलेगी उस हेतु सभी तैयार रहे ।सिंहस्थ पूर्व ईश्वर ने चाहा तो मै संत समाज के साथ आष्टा में जरूर आऊंगा। प्रभु प्रेमी संघजी के संयोजक कैलाश परमार अध्यक्ष सुरेश पालीवाल महासचिव प्रदीप प्रगति ने स्वामी जी के इस आशीष को आष्टा का सौभाग्य निरूपित किया है।

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