

updatenews247.com धंनजय जाट आष्टा 7746898041- पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष कैलाश परमार ने ग्राम टिटोरिया में आयोजित एक विशाल जन-संवाद कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव जी के विराट व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा केवल एक लोकदेवता नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान और मालवा की माटी में

रचे-बसे बाबा रामदेव जी महाराज ने उस दौर में समाज को दिशा दी जब वह जाति-पाति, छुआछूत और ऊँच-नीच की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। बाबा ने इन संकीर्णताओं से ऊपर उठकर समाज को एकजुट करने का अभूतपूर्व कार्य किया और ‘सभ्य समाज’ की स्थापना के लिए दलितों, पिछड़ों और सर्वहारा वर्ग को न केवल गले लगाया, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान और आत्म-सम्मान दिलाया। उनके जीवन का मूल मंत्र सामाजिक समानता था, जिसे उन्होंने अपने चमत्कारी व्यक्तित्व और शिक्षाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया।

आज भी उनकी समाधि पर उमड़ने वाली लाखों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि उनके प्रति आस्था जाति और धर्म की सीमाओं को लांघकर संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए समर्पित है। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम एक सुदृढ़ और समरस राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं, जहाँ हर वर्ग को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त हो।इसी पावन विचार को मूर्त रूप देने के लिए ग्राम टिटोरिया में बाबा रामदेव जी के भव्य मंदिर का निर्माण संकल्प लिया गया है, जो आने वाले समय में केवल एक धार्मिक ढांचा नहीं,

बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सौहार्द का जीवंत प्रतीक बनेगा। श्री परमार ने विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यह मंदिर अंचल की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ हमारी धार्मिक विरासत को सहेजने का कार्य करेगा, जहाँ हर श्रद्धालु बाबा के चरणों में समानता का अनुभव कर सकेगा। इस निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार करने हेतु आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में बाबा रामदेव समिति के अध्यक्ष लालजीराम मालवीय, वरिष्ठ व्यवसायी सुनील प्रगति, युवा समाजसेवी अर्जुन सिंह, अजय हरिनारायण, और सुनील कुमार मालवीय ने भी अपने विचार साझा किए।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह मंदिर क्षेत्र की पहचान बनेगा और यहाँ होने वाले धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी को हमारी गौरवशाली परंपराओं और बाबा के समानता के संदेश से जोड़ेंगे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों और समिति के सदस्यों ने मंदिर निर्माण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और सामूहिक सहयोग के माध्यम से इसे एक अद्भुत स्वरूप देने का संकल्प लिया, जिससे यह स्थान समूचे मालवा क्षेत्र के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरे।

