कैकेयी का चरित्र सिर्फ खलनायिका का प्रतीक नही वह नियति की सहयोगी भी थी – पूज्य उद्धवदास जी

updatenews247.com धंनजय जाट आष्टा 7746898041- पूर्व नपाध्यक्ष कैलाश परमार ने व्यास पीठ पर विराजित बाबा का अभिनन्दन कर आशीर्वाद लिया। रामकथा के गूढ़ अर्थों को उद्घाटित करती नगर के सैंधव छात्रावास में चल रही रामकथा में कैकेयी प्रसंग विशेष चर्चा का केंद्र रहा। व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए पूज्य उद्धवदास जी त्यागी बाबा ने कहा कि कैकेयी की संगति उसकी कुटिल दासी मंथरा से थी जिसका परिणाम यह हुआ कि लोक व्यवहार में कैकेयी को केवल दोष के चश्मे से देखा जाता है

स्त्रियों के नाम करण में प्रायः मंथरा और कैकेयी नाम से परहेज किया जाता है लेकिन कैकेयी के सिर्फ एक ही पक्ष को उध्दृत करना रामकथा की आत्मा को संकुचित करना है। उन्होंने कहा कि कैकेयी वह पात्र हैं जिनके निर्णय से राम मर्यादा पुरुषोत्तम बने और लोकधर्म की स्थापना संभव हुई। कैकेयी सिर्फ खलनायिका नही बल्कि नियति की सहयोगी भी थी उनकी दासी मंथरा भी राजनीतिक यथार्थ को पहचानने वाली स्त्री थी। त्यागी बाबा ने कथा के दौरान कहा कि जिस प्रकार कलयुग में धर्म सरल नहीं रहा, उसी प्रकार त्रेता में भी धर्म को प्रतिष्ठित करने के लिए कठोर निर्णय आवश्यक थे।

कैकेयी का वरदान मांगना व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं, बल्कि ईश्वरीय लीला का वह चरण था जिसने रामकथा को पूर्णता दी। कैकेयी सिर्फ दोषिनी ही नही थी बल्कि वह उस कथा की कीमत है जिसे हम राम कथा कह कर पूजते हैं । पूज्य त्यागी बाबा ने कहा कि राक्षस वध के लिये भी राम का वनगमन जरूरी था कैकेयी जानती थी कि रावण की आयु चौदह वर्ष ही शेष थी इसीलिए उन्होंने राम के लिए पूरे चौदह वर्ष का वनवास मांगा था उनके इस विवेचन को श्रोताओं ने भाव-विभोर होकर श्रवण किया। कथा श्रवण के पहले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश परमार ने व्यास पीठ पर विराजित कथा वाचक पूज्य त्यागी बाबा का पुष्पमाला से अभिनंदन किया।

कथा वाचक बाबा उद्धवदास जी ने दुपट्टा ओढ़ाकर श्री परमार को आशीर्वाद प्रदान किया। रामकथा के इस प्रसंग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा स्थल के आध्यात्मिक वातावरण में कैलाश परमार सहित प्रबुद्ध श्रोताओं ने कैकेयी प्रसंग पर बाबा के विचारों को नई दृष्टि देने वाला बताया। आयोजक गण जीवन सिंह शोभाखेड़ी, नारायण सिंह पूर्व प्राचार्य, पुष्पेंद्र सैंधव, भोलूसिंह ठाकुर, सोभालसिंह मुगली, कृपाल सिंह पटाडा, ओंकारसिंह ठाकुर, सोभालसिंह बागेर, मांगीलाल ठाकुर, जगन्नाथ सिंह जी साब, जीवनसिंह अरनिया जौहरी, राम ठाकुर आदि ने आगामी 6 फरवरी तक चलने वाली कथा की व्यापक व्यवस्था की है ।

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